'ज़ोर-ज़बरदस्ती से नहीं हटूँगा'

  • 1 सितंबर 2009
जसवंत सिंह
Image caption जसवंत सिंह ने निष्कासन के बाद से पार्टी में उथल पुथल मची हुई है

भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित किए जा चुके वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने साफ़ कर दिया है कि वे भाजपा के कहने से लोकसभा में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष का पद नहीं छोड़ेंगे.

बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "वैसे मेरी रुचि इस समिति में नहीं है लेकिन मैं ज़ोर-ज़बरदस्ती से नहीं हटूँगा."

भाजपा ने उनकी वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए उन्हें लोकसभा की महत्वपूर्ण समिति लोक लेखा समिति का अध्यक्ष बनाया था.

लेकिन उनकी किताब पर उठे विवाद के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया और अब पार्टी चाहती है कि वे यह पद छोड़ दें.

लोकसभा में भाजपा की उपनेता सुषमा स्वराज ने सोमवार को जसवंत सिंह से मुलाक़ात की थी. समझा जाता है कि उन्होंने जसवंत सिंह से यह पद छोड़ने का अनुरोध किया है.

जसवंत सिंह ने कहा है कि जब उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया तो उन्होंने शिमला से लौटते ही लोकसभा के महासचिव से पूछा था कि क्या उन्हें पार्टी से निकाले जाने के बाद लोक लेखा समिति के पद के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देना होगा, तो महासचिव ने सूचित किया कि ऐसा कोई बाध्यता नहीं है.

जसवंत सिंह ने कहा, "लोकसभा के महासचिव का कहना था कि नियमों के अनुसार यदि अध्यक्ष मानसिक या शारीरिक रुप से अक्षम हो जाते हैं जिसकी वजह से समिति का कामकाज रुक रहा हो, तभी उन्हें लोकसभा अध्यक्ष इस पद से हटा सकती हैं."

उनका कहना था कि लोकतंत्र में यदि पार्टियाँ किसी को किनारे करने के लिए इस तरह से हटाती रहीं तो लोकतंत्र तो गुटतंत्र में तब्दील हो जाएगा.

यह पूछे जाने पर कि भाजपा कह रही है कि उन्हें नैतिकता के नाते समति के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए जसवंत सिंह ने कहा, "भाजपा मुझे नैतिकता का सबक न सिखाए."

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