मरने वालों की संख्या 100 के पार

भारत में अधिकारियों का कहना है कि स्वाइन फ़्लू से मरने वालों की संख्या 100 के पार चली गई है.

रिपोर्टों के मुताबिक भारत में स्वाइन फ़्लू के कारण मृत्यु दर 2.3 फ़ीसदी है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 21 अगस्त तक दुनिया भर में 1799 मौते हुई हैं यानि 0.9 फ़ीसदी की मृत्यु दर.

फ़्लू से मौत के ताज़ा मामले कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से सामने आए हैं. सबसे ज़्यादा लोग पुणे में मारे गए हैं.

भारत में एच1एन1 वायरस के करीब चार हज़ार मामलों के बारे में पता चला है. इसे फैलने से रोकने के लिए कई स्कूल अस्थाई तौर पर बंद कर दिए गए थे.

भारत में मामले

रिपोर्टों के मुताबिक पुणे के विभिन्न अस्पतालों में 15 लोगों का इलाज चल रहा है. पुणे में फ़्लू से 31 लोगों की मौत हो चुकी है.

भारत में फ़्लू से सबसे ज़्यादा मौतें महाराष्ट्र (48) में हुए हैं जबकि तमिलनाडू में 15 और दिल्ली में 12 लोग मारे गए हैं.

माना जा रहा है कि पूरी दुनिया में एच1एन1 से 1700 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सबसे पहले मेक्सिको में अप्रैल में स्वाइन फ़्लू का वायरस सामने आया था और उसके बाद से ये दुनिया के कई देशों में फैल चुका है.

भारत में जिन लोगों में स्वाइन फ़्लू पाया गया है उनमें से वो लोग ज़्यादा है जो विदेशों से लौटे हैं. भारत के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर लोगों की जाँच की जा रही है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे अधिक ये चिंता सता रही है कि वायरस कहीं अपना रुप बदलकर ज्यादा ख़तरनाक न हो जाए. विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू के सभी वायरसों की तरह एच1एन1 में भी रूप बदलकर वैज्ञानिकों को चौंकाने की अपार क्षमता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में मौसम परिवर्तन के कारण विश्व के उत्तरी हिस्से में स्वाइन फ़्लू का ख़तरा और बढ़ सकता है.

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