जसवंत की किताब से प्रतिबंध हटा

  • 4 सितंबर 2009
जसवंत सिंह
Image caption जसवंत सिंह ने इस प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है

गुजरात हाईकोर्ट ने जिन्ना पर लिखी जसवंत सिंह की किताब से प्रतिबंध हटा दिया है.

किताब में सरदार पटेल पर की कई कथित टिप्पणियों का हवाला देते हुए गुजरात की भाजपा सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था.

इस किताब के प्रकाशन के बाद भाजपा ने अपने वरिष्ठ सदस्य जसवंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था और इसके बाद गुजरात सरकार ने प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया था.

जसवंत सिंह ने हाईकोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस फ़ैसले से बहुत ख़ुश हैं और इस फ़ैसले ने उन्हें सही साबित किया है.

'किताब पढ़े बिना प्रतिबंध'

गुजरात सरकार ने आपराधिक दंड संहिता की धारा 95 के तहत जसवंत सिंह की किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था.

गुजरात सरकार ने अपनी अधिसूचना में कहा था कि किताब आपत्तिजनक, भ्रमित करने वाली और जनभावना के ख़िलाफ़ है.

इस प्रतिबंध के ख़िलाफ़ दो कार्यकर्ताओं मनीषी जानी और प्रकाश शाह ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार ने किताब पर यह जाने बिना प्रतिबंध लगा दिया है कि जसवंत सिंह ने सरदार पटेल के बारे में क्या कहा है. उन्होंने सरकार के इस दावे पर भी आपत्ति जताई थी कि इस किताब से राज्य में सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं.

अदालत ने कहा है कि सरकार की अधिसूचना से लगता है कि सरकार ने प्रतिबंध लगाने से पहले किताब पढ़ी नहीं है और इसे बिना पढ़े ही इस पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया गया है.

गुजरात सरकार ने अदालत से अपील की थी कि वह अपनी अधिसूचना को फिर से जारी करना चाहती है और इसके लिए उसे कुछ मोहलत दी जाए लेकिन अदालत ने सरकार को समय देने से इनकार करते हुए प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है.

गुजरात हाईकोर्ट के इस फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए जसवंत सिंह ने एक निजी टीवी चैनल सीएनएन-आईबीएन से कहा है कि वे इस फ़ैसले से ख़ुश हैं और उन्हें लगता है कि इस फ़ैसले से उनका पक्ष सही साबित हुआ है.

उनका कहना था कि किसी किताब पर प्रतिबंध लगाना विचारों पर प्रतिबंध लगाने जैसा है और किसी किताब का विरोध करने के लिए उसके जवाब में एक और किताब लिखा जाना चाहिए.

उनका कहना था कि उनकी किताब में सरदार पटेल का ज़िक्र छह या सात बार आया है लेकिन कहीं पर भी उनके बारे में अपमानजनक बातें नहीं कहीं गई हैं.

जसवंत सिंह ने इस प्रतिबंध के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर कर रखी है.

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