राजशेखर के बाद कौन?

Image caption राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टर दुर्घटना निधन हो गया

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टर दुर्घटना मे निधन कांग्रेस के लिए अपूरणीय क्षति है.

राजशेखर रेड्डी दक्षिण भारत में पार्टी के सबसे कद्दावर नेता थे. उनकी जगह लेने वाला कोई नेता पहली नज़र मे तो क्या काफी दिमाग लड़ा कर भी नज़र नही आता.

लेकिन सच्चाई तो यही है कि उनकी जगह किसी को तो लेनी ही है या फिर वो जगह किसी को तो मिलेगी ही.

अब कांग्रेस के सामने मुद्दा ये है कि उनके पुत्र को राज्य की कमान सौंप दी जाए या फिर ये ज़िम्मेदारी किसी और को दी जाए.

दिल्ली मे आंधप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के कई दावेदारों के नाम लिए जा रहे हैं.

इन नामों मे केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. उनके नाम के अलावा जो नाम सामने आ रहे हैं उनमे केंद्रीय मंत्री पुरेन्दश्वरी देवी, पालम राजू और राज्य के वित्त मंत्री के रोसैया हैं.

कांग्रेस पर क़रीबी नज़र रखने वाली और आंध्र प्रदेश की राजनीति को कई दशक से कवर करने वाली वरिष्ठ पत्रकार कल्याणी शंकर कहती हैं, "कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रोसैया राज्य के सबसे वरिष्ठ नेता हैं और जिस तरह से उन्होने इस पूरे संकट को संभाला उसमे उनका अनुभव साफ़ झलकता है, लेकिन वे मुख्यमंत्री नही बन सकते. पिछले 30 साल से कभी भी उनका नाम इस पद के लिए नही लिया गया, क्योंकि वो वैश्य जाति से हैं और आंध्रप्रेदश मे रेड्डियों का वर्चस्व रहा है."

वो कहती हैं, "मुझे लगता है की जयपाल रेड्डी इस दौड़ मे सबसे आगे हैं, वो वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं और साथ ही उनके नाम पर कोई विवाद भी नही है और हाई कमान को भी वे नापंसद नहीं हैं."

हालांकि राज्य मे विधायकों और कई नेताओं ने राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सुझाया है. लेकिन दिल्ली मे कांग्रेस के जानकार मानते हैं कि अंतिम फ़ैसला हाई कमान का ही होगा और आमतौर पर इस तरह के फ़ैसले भावुकता मे नहीं लिए जाते.

कांग्रेस के कुछ जानकार कहते हैं कि राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी को प्रशासनिक अनुभव ना होना, उन्हे मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए काफ़ी नही है.

जानकार कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद अगर राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनाए जा सकते हैं तो फिर जगनमोहन रेड्डी को मौक़ा दिए जाने मे भला क्या परेशानी हो सकती है.

अब देखना ये है कि सप्ताह भर बाद जब राजकीय शोक समाप्त होगा और नए मुख्यमंत्री की घोषणा होती है तो तब नेताओं की वरिष्ठता, साख और अनुभव भारी पड़ेगा या फिर भावुकता.

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