झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर घमासान

रघुवर दास
Image caption भाजपा चुनाव कराने की माँग कर रही है.

झारखंड में विधानसभा चुनावों को लेकर एक तरह का राजनीतिक घमासान राज्य में खड़ा होता नज़र आ रहा है. विधानसभा के चुनावों को जल्द से जल्द कराने के मुद्दे पर भाजपा आक्रामक मुद्रा में नज़र आ रही है.

शनिवार को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने विधानसभा को निलंबित रखे जाने के ख़िलाफ़ सामूहिक इस्तीफ़े की धमकी दी है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रघुवर दास ने शनिवार को राँची में बीबीसी से कहा, "इतने लंबे समय तक विधानसभा लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है जब अगले साल इसका कार्यकाल पूरा हो रहा है."

उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन तो लागू कर दिया लेकिन विधानसभा भंग नहीं की. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा भंग कर अविलंब चुनाव कराए जाने चाहिए ताकि जनता लोकतांत्रिक तरीके से नई सरकार चुन सके.

उन्होंने कहा, "पार्टी के विधायक रविवार को मिल रहे हैं. हम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का मन भी बना चुके हैं. इसके समय को लेकर निर्णय लिया जाना बाकी है. रविवार की बैठक में तय करके हम सामूहिक तौर पर इस्तीफ़ा दे सकते हैं."

भाजपा ने 11 सितंबर को राजभवन का घेराव करने की घोषणा भी की है.

कांग्रेस की दलीलें

उधर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पूरे घटनाक्रम के मद्देनज़र राज्य की राजधानी रांची पहुंचे हुए हैं. उन्होंने कहा है कि अगले कुछ सप्ताहों का समय राज्य और देश में पर्वों का है. इसीलिए त्योहारों के मद्देनज़र अभी चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं.

उधर कांग्रेस के कुछ राज्य स्तर के नेता और भी तर्क दे रहे हैं. कुछ नेताओं ने बातचीत में बीबीसी से कहा कि राज्य में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन शीघ्र ही होने जा रहा है इसलिए सूबे का ध्यान उस ओर रहेगा. चुनावों को इसलिए भी आगे बढ़ाया जा रहा है.

पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक इस मामले को लेकर एक राजनीतिक लड़ाई छेड़ने की मुद्रा में नज़र आ रहे हैं.

उनका तर्क है कि देश के बाकी राज्यों में भी पर्व-त्योहारों का समय है फिर भी वहाँ तय समय में चुनाव कराए जा रहे हैं. फिर झारखंड में चुनावों को लेकर आनाकानी क्यों हो रही है.

भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस जानबूझकर विधानसभा चुनावों को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगी हुई है. उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक क़दम करार दिया है.

राजनीतिक संकट

ग़ौरतलब है कि इसी साल 12 जनवरी को मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के इस्तीफ़े के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए में नए मुख्यमंत्री को लेकर सहमति नहीं बन सकी और तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफ़ारिश कर दी थी.

फिलहाल 82 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में 64 सदस्य ही हैं. इनमें से 22 भाजपा के और 17 झारखंड मुक्ति मोर्चा के हैं. कांग्रेस के नौ और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पाँच विधायक हैं.

लोकसभा चुनाव में पाँच विधायक सांसद बन गए थे जिससे पाँच सीटें खाली हो गईं.

जनता दल युनाईटेड के दो विधायक इस्तीफ़ा दे चुके हैं और सात विधायकों की सदस्यता दल-बदल क़ानून के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने ख़त्म कर दी थी.

राज्य के राजनीतिक दलों का कहना है कि अब राज्य में तत्काल चुनाव कराकर नई विधानसभा के गठन का काम कर लिया जाना चाहिए ताकि इस राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति से निकला जा सके.

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