सामाजिक न्याय पर मनमोहन की चिंता

  • 7 सितंबर 2009
मनमोहन सिंह
Image caption प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर राज्य सरकारों से मुस्तैदी दिखाने का आहवान किया है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अनुसूचित जाति, जनजाति और बुज़ुर्गों के ख़िलाफ़ होने वाली ज़्यादतियों के मुक़दमों से सिर्फ़ 30 प्रतिशत से भी कम में सज़ाएँ होने पर चिंता जताई है.

प्रधानमंत्री ने सोमवार को नई दिल्ली में सामाजिक कल्याण और न्याय पर राज्य मंत्रियों के एक सम्मेलन का उदघाटन करते हुए राज्य सरकारों से कहा है कि वे इस मुद्दे पर ज़्यादा ध्यान दें और ऐसे मामलों में दर्ज होने वाले मुक़दमों को प्राथमिकता के आधार पर लड़ना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा, "अनुसूचित जाति, जनजाति और वरिष्ठ नागरिकों यानी बुज़ुर्गों पर होने वाली ज़्यादतियों के बारे में मिल रही ख़बरें बहुत व्यथित करने वाली हैं और ऐसी ज़्यादतियाँ होने की ख़बरें लगातार मिलती हैं. मैंने दरअसल अनुसूचित जाति, जनजाति (अत्याचार निरोधक क़ानून) के प्रावधान लागू कराने के लिए हाल ही में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे हैं."

डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा, "यह व्यथित करने वाली बात है कि अनुसूचित जाति और जनजाति पर होने वाले अत्याचार संबंधी मुक़दमों में सज़ाएँ होने की दर 30 प्रतिशत से भी कम है जो भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज होने वाले मुक़दमों में सज़ाएँ होने की 42 प्रतिशत की दर से भी कम है. राज्य सरकारों को इस मुद्दे पर और ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है"

प्रधानमंत्री ने राज्य मंत्रियों से कहा कि राज्य और ज़िला स्तरीय सतर्कता समितियों की नियमित तौर पर बैठकें की जाएँ और अदालतों में ऐसे मुक़दमों की मुस्तैदी से पैरवी प्राथमिकता के साथ की जाए.

समाज की ज़िम्मेदारी

समाज के उपेक्षित तबके की तरफ़ आम लोगों की मानसिकता में मूलभूत बदलाव लाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सभी लोगों को विकास प्रक्रिया में बराबर भागीदारी मिलनी चाहिए.

उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार विकलांग व्यक्तियों के लिए बने क़ानून में कुछ संशोधन करने के बारे में सोच रही है ताकि इस क़ानून के प्रावधान संयुक्त राष्ट्र के क़ानून के प्रावधानों से मेल खाएँ."

प्रधानमंत्री ने कहा, "केंद्र सरकार प्रयोग के आधार पर इस वर्ष एक नई योजना शुरू करने जा रही है जिसका नाम होगा - प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना जिसमें एक हज़ार गाँवों का विकास किया जाएगा. ये गाँव वो होंगे जिनकी 50 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी अनुसूचित जाति वर्ग से होगी. इस योजना के तहत अनेक योजनाओं को मिलाकर इन गाँवों में लागू किया जाएगा. अगर यह पायलट योजना कामयाब होती है तो इसका विस्तार भी किया जाएगा."

बढ़ते शहरीकरण और परिवारों के विघटन के परिणामस्वरूप बहुत छोटे-छोटे परिवार बनने के दौर में बुज़ुर्गों की ख़राब हो रही हालत पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समाज की ज़िम्मेदारी है कि बुज़ुर्गों की पर्याप्त देखभाल की जाए.

उन्होंने कहा, "संसद ने दिसंबर 2007 में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों यानी बुज़ुर्गों के कल्याण और उनकी देखभाल संबंध एक बहुत ही महत्वपूर्ण क़ानून बनाया था. लेकिन राज्य सरकारों को निजी तौर पर इस क़ानून पर अमल सुनिश्चित करना होगा. पाँच राज्यों को अभी तो इस क़ानून की अधिसूचना भी जारी करनी बाक़ी है. यहाँ तक कि जिन राज्यों ने इस क़ानून की अधिसूचना जारी कर दी है वहाँ भी इस पर अमल बहुत धीमा रहा है जो उन्हें उच्च प्राथमिकता के आधार पर करना होगा."

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा के अनुसार माता-पिता को परिवार में बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है लेकिन परिवारों के टूटने और बेहद छोटे-छोटे परिवार बनने की वजह से माता-पिता का यह स्थान छिन गया है और आज हालात बहुत भिन्न हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि बदलती सामाजिक आवश्यकताओं, व्यक्तिवाद पर बढ़ता ज़ोर, ख़ुद पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करना और निजी स्वतंत्रता की वजह से बुज़ुर्गों पर से ध्यान हटा है और उन्हें हाशिये पर पहुँचाया जा रहा है.

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