हज़ारों बेरोज़गार होकर लौटे

दुबई में कुछ कामगर
Image caption भारतीय कामगारों को काम की तलाश करने में परेशानी हो रही है

आप्रवासी मामलों के मंत्रालय के एक अंतरिम अध्ययन के मुताबिक मध्यपूर्व ख़ासकर संयुक्त अरह अमीरात (यूएई) में रहने वाले भारतीयों पर आर्थिक मंदी का असर पड़ा और वो भारी संख्या में भारत का रुख कर रहे हैं.

ये अध्ययन ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म डेलायट ने किया है और इसे इंडियन काउंसिल ऑफ़ ओवरसीज़ ओवरसीज़ एंर्प्लॉयमेंट यानी आईसीओई ने आप्रवासी मामलों के मंत्रालय के आग्रह पर करवाया है.

इस अंतरिम रिपोर्ट को जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा.

आईसीओई बिना किसी मुनाफ़े के काम करने वाली संस्था है.

इस अध्ययन की अंतरिम रिपोर्ट के मुताबिक़ दुबई में रहने वाले भारतीयों पर आर्थिक मंदी का असर पड़ा है और यूएई से बड़ी संख्या में भारतीय वापस आ रहे हैं. वहाँ पर भवन निर्माण, होटल क्षेत्र जैसे क्षेत्रों पर मंदी का असर पड़ा है.

अंतरिम रिपोर्ट के मुताबिक़ कुवैत में लोक निर्माण और वित्तीय क्षेत्र पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा है और वहाँ करीब 10,000 लोगों की नौकरियाँ गई हैं.

अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार बहरीन में करीब 20,000 भारतीयों की नौकरियों पर असर पड़ेगा और ज़्यादातर नौकरियों का नुक़सान भवन निर्माण क्षेत्र में आई सुस्ती की वजह से हुआ है.

मलेशिया में भारतीयों की नौकरियों पर इतना असर नहीं पड़ा है. वहाँ करीब 800 भारतीयों की नौकरियाँ गई हैं. सउदी अरब और ओमान में भी जानकारी जुटाई जा रही है.

आप्रवासी मामलों के मंत्रालय के सचिव के मोहनदास कहते हैं हालांकि उनके पास ये रिपोर्ट अभी नहीं पहुँची है लेकिन वो मानते हैं कि मध्यपूर्व से लोगों का भारत आना जारी है.

उन्होंने कहा, “हमें पता चला है यूएई खासकर दुबई से लोग वापस लौटकर आए हैं. तीन महीने पहले इनकी संख्या 50,000 और डेढ़ लाख के बीच थी. ये संख्या उससे पहले के नौ महीनों के दौरान की है.”

पैसा ज़्यादा भेजा

के मोहनदास कहते हैं कि सउदी अरब के बारे में कहानी कुछ अलग है. उनके मुताबिक वर्ष 2009 में भारत से सऊदी अरब जाने वाले लोगों की संख्या 2008 से ज़्यादा थी. इसका मतलब है कि सउदी अरब में नौकरियाँ विश्वव्यापी मंदी से अछूती रही हैं.

के मोहनदास के मुताबिक मंत्रालय ने राज्य सरकारों से वापस आने वाले लोगों की संख्या के बारे में पूछा है और उन्हें जानकारी का इंतज़ार है.

उन्होंने बताया, “राज्य सरकारों के साथ कल और परसों बैठक है. अगर किसी राज्य पर लोगों के वापस आने का असर पड़ता है तो वो राज्य होंगे केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, और किसी हद तक उत्तर प्रदेश और राजस्थान.”

और उन लोगों का क्या जो लोग वापस आए हैं, क्या सरकार उनके लिए कुछ करेगी, इस सवाल पर के मोहनदास ने कहा, “जो लोग वापस आए हैं, उनके लिए किसी पुनर्वास पैकेज पर विचार अभी फ़िलहाल नहीं किया गया है. भारत और भारत के बाहर निजी क्षेत्र में नौकरियाँ गई हैं. और उनका पुनर्वास किस तरह से किया जाए इस पर विचार करने की ज़रूरत है.”

उन्होंने बताया कि भारत वापस आने वाले लोगों में इज़ाफ़े के बावजूद भारतीयों के भेजे जाने वाले धन में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इसके कई कारण हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, “हो सकता हो कि लोगों को भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा हो जिस पर दूसरे देशों की तुलना में आर्थिक मंदी का ज्यादा असर नहीं पड़ा. भारतीय अर्थव्यवस्था में भी बढ़ोत्तरी हो रही है. ये भी हो सकता हो कि लोग भारत वापस आना चाह रहे हों और इसलिए पैसा भारत ला रहे हैं. लेकिन अभी ये साफ़ नहीं है कि ये बढो़त्तरी कब तक जारी रहेगी.”

इस अंतरिम रिपोर्ट में की गई सिफ़ारिशों में कहा गया है कि भारत के बाहर जाकर नौकरी करने वालों और नौकरी देने वालों के बारे में पूरी जाँच की जाए, किन क्षेत्रों में भारतीय निपुण हैं इनके बारे में एक अध्ययन करवाया जाए, भारत के बाहर नौकरियों के बारे में जानकारी देने के लिए एक हेल्प डेस्क बनाया जाए और इस बारे में एक वेबसाईट बनाई जाए.

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