इशरत रिपोर्ट को चुनौती

गुजरात सरकार ने कहा है कि इशरत जहाँ मुठभेड़ मामले में जस्टिस तमांग रिपोर्ट को वो चुनौती देगी.

Image caption इशरत जहाँ की 2004 में हत्या कर दी गई थी

गुजरात पुलिस की अपराध शाखा ने 15 जून 2004 को अमजद, ज़ीशान, जावेद और इशरत जहाँ को मार दिया था. गुजरात पुलिस का दावा था कि ये चारों आतंकवादी थे और पुलिस ने इन्हें मुठभेड़ में मार दिया है.

पर मैजिस्ट्रेट एसपी तमांग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये मुठभेड़ फ़र्ज़ी थी. इशरत की माँ शमीमा के याचिका पर मामले की जाँच के लिए समिति गठित की गई थी.

लेकिन अब गुजरात सरकार ने इस रिपोर्ट की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज कर दिया है. गुजरात सरकार के प्रवक्ता जय नारायण व्यास ने अहमदाबाद में पत्रकार वार्ता में कहा कि ये रिपोर्ट जल्दबाज़ी में तैयार की गई है और इसमें सभी क़ानूनी पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया है.

उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका तक नहीं दिया गया. प्रवक्ता ने सवाल उठाते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तीस नवंबर तक ये रिपोर्ट देनी होगी. कोर्ट को भी अंदाज़ा था कि इसमें कुछ वक़्त तो लगेगा ही. फिर समिति को इतनी जल्दबाज़ी क्या था उसने सितंबर में ही रिपोर्ट सौंप दी."

प्रवक्ता ने ये बात भी उठाई की इशरत जहाँ और जावेद के आतंकवादियों के साथ संबंध थे. उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार की अपनी रिपोर्ट में कहा गया कि इनके लश्कर-ए-तैबा के साथ संबंध थे."

वहीं इशरत के परिवारवालों ने मुंबई में हुई एक पत्रकार वार्ता की. उनकी बहन ने कहा, "वर्ष 2004 से हम ये साबित करने की कोशिश कर रह हैं कि ये फ़र्ज़ी मुठभेड़ थी. मेरी बहन आतंकवादी नहीं थी. अब जब अदालत ने कहा है कि ये फ़र्ज़ी मुठभेड़ थी, तो हम ख़ुश हैं. जिन लोगों ने ये काम किया उन्हें कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए."

'फ़र्ज़ी मुठभेड़'

गुजरात पुलिस ने 2004 में दावा किया था कि उन्हें ख़ुफ़िया सूचना थी कि लश्कर-ए-तैयबा का आत्मघाती दस्ता मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से शहर में पहुँचा है.

पुलिस का दावा था कि ये आतंकवादी शहर में घुस रहे थे तभी पुलिस ने इन्हें घेर लिया और फिर गोलीबारी शुरू हो गई और चार आतंकवादी मारे गए.

पुलिस ने यह भी कहा था कि इनमें से दो चरमपंथी पाकिस्तानी नागरिक थे. पुलिस की टीम का नेतृत्व डीजी वनज़ारा कर रहे थे. इस समय वे सोहराबुद्दीन फ़र्जी मुठभेड़ मामले में पुलिस हिरासत में हैं.

लेकिन अहमदाबाद की मेट्रोपोलिटन अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि गुजरात पुलिस ने ये हत्या की है. अदालत ने अपनी कड़ी टिप्पणी में कहा कि इस हत्या में शामिल गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए ऐसा किया है.

ये पुलिस अधिकारी मोदी सरकार से प्रोमोशन और जनता से शाबाशी चाहते थे. वे आतंकवादियों को ये संदेश देना चाहते थे कि गुजरात में जो भी कुछ करने आएगा, उसका अंजाम ऐसा होगा.

अदालत ने कहा है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की वाहवाही लेने के लिए कुछ पुलिस अधिकारियों ने यह आपराधिक काम किया है.

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