भाजपा विधायकों का इस्तीफ़ा

यशवंत सिन्हा
Image caption झारखंड में भाजपा की रणनीति यशवंत सिन्हा की अगुआई में बन रही है.

झारखंड विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के सभी 22 विधायकों नें अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में इन विधायकों नें सबसे पहले झारखंड के राज्यपाल कीथल शंकरनारायणन से मुलाक़ात की और राज्य में जल्द विधानसभा के चुनाव कराने की मांग की.

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के विधायकों का काफिला विधान सभा पहुंचा . काफले में पार्टी के वरिष्ट नेता यशवंत सिन्हा और पूर्व मुख्या मंत्री अर्जुन मुंडा भी शामिल थे.

विधान सभा अध्यक्ष आलमगीर आलम के समक्ष एक एक कर विधायक हाज़िर होते रहे और अपना अपना इस्तीफा उन्हें थमाते रहे.

बाद में बीबीसी से बातचीत के दौरान यशवंत सिन्हा ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ सदन की अवमानना का प्रस्ताव ला सकती है.

उन्होंने कहा “गृह मंत्री नें संसद में आश्वासन दिया था की मानसून के बाद झारखंड में विधानसभा के चुनाव करा लिए जाएंगे.उन्होंने सदन को गुमराह करने का काम किया है.तीन अन्य राज्यों में चुनाव हो सकते हैं तो झारखंड में क्यों नहीं ? राष्ट्रपति शासन के ज़रिए कांग्रेस पार्टी झारखंड में शासन कर रही है और यहाँ की संपदाओं का दोहन कर रही है जिस कारण भ्रष्टाचार का बोलबाला है.”

वहीँ पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को किस कदर बढावा दिया है उसकी जीती जागती मिसाल है कि यूपीए के कम से कम दो मंत्री फिलहाल जेल में हैं .

कांग्रेस के प्रवक्ता वीपी शरण कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी अपने अंतर्कलह से देश का ध्यान हटाने के लिए “झारखंड में ड्रामा कर रही है.” इस्तीफा ही देना था तो जब राष्ट्रपति शासन लगा था तभी देना चाहिए था.यह सब कुछ नहीं सिर्फ नाटक है.”

इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संजय सेठ नें उच्चतम न्यायलय में झारखंड में राष्ट्रपति शासन समाप्त करने और विधान सभा के चुनाव कराने संबंधी एक जनहित याचिका दायर की है.

झारखंड में 19 जनवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है और इस दौरान किसी भी राजनितिक दल या गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है.भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के इस्तीफ़े के बाद सदन विपक्षविहीन हो गया है .

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