चीता भारत लाने के प्रयास तेज़

एशियाई चीता
Image caption भारत में चीता आख़िरी बार वर्ष 1947 में देखा गया था

भारत में विलुप्त हो चुके वन्य जीव चीते को फिर से आबाद करने के प्रयास शुरु हो गए है. इसके लिए देश-विदेश से विशेषज्ञ राजस्थान में बीकानेर के गजनेर में जमा हुए.

बुधवार से विशेषज्ञों ने उन उपायों पर विचार करना शुरु किया है जिनके तहत चीता फिर से भारत में नज़र आएगा. योजना अफ़्रीका से चीता भारत में लाने की है.

इस मक़सद के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात को प्राथमिकता दी जा रही है.

भारत में चीता 1947 में आखिरी बार मध्य प्रदेश में देखा गया था. उसके बाद भारत ने उसे विलुप्त प्राणियों की सूचि में डाल दिया था.

फिर ये प्रक्रति का सबसे तेज़ दौड़ने वाला जानवर भारत में कभी दिखाई नहीं दिया.

'गहन सर्वे होगा'

दो दिन चलने वाली विशेषज्ञों की बैठक के पहले दिन राजस्थान के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक आरअन मेहरोत्रा ने बीबीसी को बताया कि राज्यों की सूची पर विचार किया गया है और अब इस पर गहन सर्वे किया जायेगा.

मेहरोत्रा कहते है इस सूची में छत्तीसगढ़ का नाम भी शामिल है. मेहरोत्रा के मुताबिक इसके लिए अफ़्रीका से चीता लाने पर विचार किया जा रहा है.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले इरान से चीता लाने की बात हुई थी लेकिन ईरान इसके लिए ज़्यादा इच्छुक नज़र नहीं आया.

भारतीय वन सेवा के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी वीएस सक्सेना कहते हैं, "राजस्थान की आबो-हवा चीते के लिए बहुत मुफ़ीद है. वर्ष 1938 में चीता जयपुर के आसपास दिखाई दिया था. गजनेर के आसपास का रेगिस्तानी इलाक़ा चीते के लिए ठीक है क्योंकि वहां बड़ी तादाद में काले हिरन, चिंकारा, नील गाय और दुसरे जानवर हैं जो चीते के लिए ठीक हैं."

गजनेर एक रमणीय स्थान है और रियासती दौर में ये शाही लोगो के सैर-सपाटे का केंद्र था. यहाँ एक वन अभ्यारण भी है.