बांग्लादेश: हिंदुओं की संपत्ति लौटाने पर विचार

शेख़ हसीना
Image caption आठ महीने पहले सत्ता में आई शेख हसीना की सरकार क़ानून में संशोधन पर विचार कर रही है

बांग्लादेश की सरकार ने कहा है कि वह उस क़ानून को बदलना चाहती है जिसके तहत 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हिंदू अल्पसंख्यकों की संपत्ति को बड़े पैमाने पर ज़ब्त कर लिया गया था. उस समय पूर्वी पाकिस्तान अविभाजित पाकिस्तान का हिस्सा था और बाद में यही भाग बांग्लादेश कहलाया.

बांग्लादेश में आठ महीने पहले सत्ता में आई शेख़ हसीना वाजेद की सरकार में क़ानून मंत्री शफ़ीक़ अहमद ने बीबीसी को बताया कि इस क़ानून में प्रस्तावित संशोधन पर अंतिम निर्णय लिया जाना है और फिर इस पर संसद में बहस होगी.

उनका कहना था कि संशोधन के पारित हो जाने के बाद जिन लोगों को ग़ैर-क़ानूनी ढंग से अपनी संपत्ति से बेदख़ल किया गया था, उन्हें उनकी संपत्ति लौटा दी जाएगी.

लाखों पलायन कर गए

वेस्टिड प्रॉपरटी एक्ट के तहत सरकार उस भूमि और उन इमारतों को अपने कब्ज़े में ले सकती थी जिनके मालिक पूर्वी पाकिस्तान से पलायन करने वाले हिंदू थे.

ये ख़ासा विवादित और लोगों को विभाजित करने वाला क़ानून था. हिंदू कहते हैं कि वे महसूस करते हैं कि इस क़ानून के कारण वे अपने ही देश में दूसरे दर्जे के नागरिक हो गए.

ये क़ानून तब पारित हुआ था जब वर्ष 1965 की जंग के बाद पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं के ख़िलाफ़ दंगे हुए थे और लाखों हिंदू देश छोड़कर पर पड़ोस में भारत में भाग गए थे.

सरकार ने इन्हें देश का दुश्मन क़रार दिया था और इनकी संपत्ति ज़ब्त कर ली थी.

लेकिन इसमें से ख़ासी संपत्ति प्रमुख विपक्षी दलों से संबंध रखने वाले लोगों के हाथों में चली गई थी.

लेकिन पूर्वी पाकिस्तान (जो बाद में बांग्लादेश बना) में बसे रहने वाले लाखों हिदू, जिनकी संख्या लगभग 10 प्रतिशत है, कहते हैं कि इस का़नून का उनके ख़िलाफ़ भी दुरुपयोग किया गया है और उन्हें उनकी पुश्तैनी संपत्ति से बेदख़ल कर दिया गया है.

भूमि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि संशोधन के बात भी उन लोगों को अपनी संपत्ति लेने का अधिकार नहीं होगा जो 1965 में देश छोड़कर भारत भाग गए थे और जिनके पास बांग्लादेशी नागरिकता नहीं है.