प्रणब मुखर्जी की सलाह, खर्चे से बचिए

  • 11 सितंबर 2009

मंत्रियों को मितव्ययिता का पाठ जब से वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी ने पढ़ाया है उस पर बहुत तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं.

पर वित्त मंत्री का कहना है कि वो सरकार के मंत्रियों को केवल याद दिला रहे थे कि आम आदमी की सरकार वित्तीय संकट के इस दौर में कैसे अपनी कमर कसे.

शुक्रवार को इंडियन विमेंस प्रेस कोर में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वो सरकार के गै़र योजनाबद्ध खर्च को दस प्रतिशत कम करना चाहते हैं और इस दिशा में जो कदम उठाए जाएँ उनका स्वागत है.

शायद उनकी ये कसरत काफ़ी मशक्कत भरी रहे. पर वो कहाँ हार मानने वाले हैं.

उन्होंने सरकार के दो केंद्रीय मंत्रीयों के पांच सितारा घर छुड़वाने के बाद अब लोक सभा अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति से कहा है कि वो सांसदो को भी खर्चीली आदते छोड़ने की हिदायत दें.

बचत की हिदायत

ये हिदायतें कोई नई नहीं है पर आर्थिक संकट के इस दौर में वे केवल सांसदो को उनका फ़र्ज़ याद दिला रहे हैं. और चूँकि कि वो केवल कांग्रेस पर ज़ोर लगा सकते है इसलिए कांग्रेस सांसदों से विशेष आग्रह कह रहे है.

उन्होंने कहा, “मैने केवल दो आग्रह किए हैं, देश में यात्रा के दौरान इकॉनमी क्लास में हवाई यात्रा की जाएँ क्योंकि ये छोटी दूरी की उड़ानें हैं और उनको ज़्यादा तकलीफ़ नहीं होगी. दूसरा ये कि जहाँ तक हो सके सम्मेलन और बैठकों का आयोजन पांच सितारा होटलों में न कर के सरकारी कांफ्रेंस हॉल में करें. इससे सांसदो के रहने खाने और यात्रा का खर्च कम होगा. और बोनस ये की लोग ज़्यादा संख्या में आएँगे.”

विदेश यात्रा के लिए उन्होंने स्पष्ट किया, “उच्च श्रेणी में जाने पर रोक नहीं लगाई गई है. और विदेशी मेहमानों की आप पांच सितारा होटलों में मेज़बानी कर सकते है. वैसे भी खर्च कम करने के उपाय हर मंत्रालय के वित्त अधिकारी बता ही सकते है, तो मंत्रियों को चिंता करने की ज़रुरत नहीं.”

जहां तक कांग्रेस के सांसदो का सवाल है, उन्हें हिदायत दी गई है कि है कि उनके वेतन पर विचार किया जाए यानि अपने अंदाज़ में वित्त मंत्री ने अपनी बात कह दी.

सूखे के प्रभाव की चिंता और वित्त घाटे को 6.8 प्रतिशत से अगले साल तक 5.5 प्रतिशत पहुंचाने और फिर उसके अगले साल इसे 3.5 प्रतिशत तक करने की इच्छा उन्होंने व्यक्त की.

यानि चिंता के बादल छट रहे है और अर्थव्यवस्था के सुधार में सरकार और सरकारी महकमों के साथ- साथ हर सांसद की मदद की इच्छा वित्तमंत्री के नाते प्रणब मुखर्जी रख ही सकते है. चाहे कोई सुने और माने नहीं.

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