शोपियां मामले में चार को ज़मानत

Image caption शोपियां मामले को लेकर जम्मू कश्मीर में काफ़ी तनाव का माहौल रहा था.

भारत प्रशासित कश्मीर में हाई कोर्ट ने शोपियां ज़िले में दो महिलाओं की हत्या और बलात्कार मामले में गिरफ़्तार हुए चार अफ़सरों को ज़मानत दे दी है.

इन चारों में तत्कालीन ज़िला पुलिस प्रमुख जावेद इक़बाल मट्टू, उप पुलिस अधीक्षक रोहित बसकोत्रा, शफ़ीक अहमद और करीम गाज़ी शामिल हैं जिन्हें 15 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था.

हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुनील हाली ने निर्देश दिए हैं कि ये लोग शोपियां और पुलवामा ज़िले में दाखिल नहीं होंगे और कोर्ट के आदेश के बगैर राज्य से बाहर नहीं जाएँगे.

जज ने ये भी कहा कि अगर बाद में इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोई सबूत मिलते हैं तो इन्हें लेकर जाँच एजेंसी सेशन कोर्ट के पास दोबारा अपील कर सकती है.

जावेद इक़बाल मट्टू की पत्नी आदेश के समय अदालत में मौजूद थीं.

बलात्कार का आरोप

चारो अधिकारियों को हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश के तहत गिरफ़्तार किया गया था. खंडपीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश बरीन घोष कर रहे हैं.

15 जुलाई के आदेश में इन लोगों के खून के नमूने लेने के लिए भी कहा गया था. इन नमूनों को मृत महिलाओं के वेजाइनल स्वैब मतलब योनि से लिए गए नमूने से मिलाया जाना था.

दिल्ली में हुई जाँच के बाद कहा गया है कि वेजाइनल स्वैब उन महिलाओं के नहीं है जिनका बलात्कार हुआ है और सबूतों से छेड़छाड़ की गई है.

हत्या और बलात्कार मामले में सबूत मिटाने के आरोप में इन अधिकारियों को सरकार ने निलंबित कर दिया था.

जस्टिस हाली ने शुक्रवार को कहा कि जाँच एजेंसी ने इस बारे में जानकारी नहीं दी है कि आख़िर सबूतों से छेड़छाड़ किसने की.

दो दिन पहले ही सरकार ने शोपियां मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी है.

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