सहारनपुर में मातम का माहौल

  • 13 सितंबर 2009
मृतक
Image caption इससे पहले गुजरात में जहरीली शराब से 127 लोग मारे गए हैं.

सहारनपुर के गाँव खजूरी में मातम जैसा माहौल है. यहाँ कामकाज ठप्प है. श्याम कुमार, शिवचरण, तीर्थपाल, शीशपाल, दिलीप कुमार, संतराम, ओम कैलाश, राजेंद्र ठाकुर. ये सभी नाम हैं उन लोगों के जो करीब 30 घंटे के भीतर एक के बाद एक मिलावटी शराब पीने की वजह से मारे गए.

जहरीली शराब पीने के कारण पहली मौत मंगलवार को हुई थी जिसके बाद अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है.

स्थानीय ज़िलाधीश ने बीबीसी को बताया कि इस मामले में पुलिस ने सूरजभान और मनोज त्यागी नामक दो लोगों के अलावा 34 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इसी मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया गया है.

मरने वालों की ख़बरें खजूरी के अलावा आसपास के कई गाँव और सहारनपुर के आसपास के इलाकों से आ रही हैं.

श्याम कुमार 35 वर्ष के थे औऱ मज़दूरी करते थे. उनके पाँच बच्चे थे जिनमें से सबसे बड़ी बेटी पूजा कक्षा 10 की छात्रा हैं. उनके घर में भी बाकी के घरों की तरह आने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है. घर के बाहर ही श्याम कुमार की तस्वीर एक स्टूल पर रखी हुई है जिस पर हार चढ़ा हुआ है, बाहर लोगों की भीड़ है औऱ अंदर घर से महिलाओं के रोने की आवाज़ ज़ोर से आ रही है.

अंदर श्याम कुमार की 70 वर्ष माँ नानकी रो तो रही हैं लेकिन पिछले तीन दिनों से रोते रोते जैसे उनके आँसू सूख गए हैं. वो बार बार श्याम का नाम ले रही हैं और कहती हैं कि मैं अपना लाल खो बैठी हूँ.

बाकी के लोगों की तरह श्याम ने भी दिनभर थकहार घर लौटने के बाद थकान मिटाने के लिए 15 रुपए थैली के रेट में बिकने वाली शराब खरीदी. उन्हें लगा कि वो गुड़ से बनने वाली कच्ची शराब खरीद रहे हैं लेकिन कुछ ही घंटों में उनकी हालत खराब होनी शुरू हो गई.

उन्हें कुछ भी दिखना बंद हो गया, उनके हाथ पैर मुड़ गए, उनके मुँह से झाग निकलना शुरू हो गया औऱ छाती में जलन शुरु हो गई. थोड़ी ही देर में उनकी मौत हो गई. गाँव वालों को अस्पताल से पता लगा कि उनकी मौत रेक्टिफाइड स्पिरिट से बनी शराब से हुई है. यही हाल बाकी लोगों का हुआ है.

कक्षा 10 में पढ़ने वाली पूछा हालांकि खुद रो रही है लेकिन वो बाकी के घर वालों को दिलासा भी दे रही हैं.

पूजा कहती हैं, ‘मैं उन लोगों को ज़िम्मेदार मानती हूँ जिन्होंने मेरे पापा को शराब दी औऱ सरकार उन्हें रोकती नहीं है. जो पुलिस वाले भी हैं, वो पैसे लेते हैं औऱ कोई कार्रवाई नहीं करते. क्या अब हमारे लिए सरकार कुछ कर सकती है? हमें पढ़ा लिखा सकती है?’

दिलीप कुमार के घर भी बुरा हाल है. उनके तीन बच्चे हैं. उनकी पत्नी का भी रो रोकर बुरा हाल है. उनकी पत्नी मायावती सरकार से मदद की माँग करती हैं.

पूरे गाँव में इस घटना को लेकर नाराज़गी है. उनका कहना है कि उन्होंने बार बार पुलिस को चेताया औऱ शराब बेचने वालों के खिलाफ़ कार्रवाई करने को कहा, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया. वो पुलिस पर मिली भगत का आरोप लगाते हैं.

गाँव खजूरी में रहने वाले ज़्यादातर लोग दलित हैं औऱ जिन आठ लोगों की मृत्यु यहाँ हुई है उनमें से सात दलित परिवारों से हैं.

Image caption पूजा के पिता की भी मौत जहरीली शराब पीने से हुई है. वो सरकार और पुलिस से बहुत नाराज़ है.

उधऱ प्रशासन का कोई भी व्यक्ति इस बारे में बोलने को तैयार नहीं है. शायद इसका वजह मामले में कुछ अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई हुई है.

देवबंद के सर्किल अफ़सर अवनीश कुमार मिश्र ने हमें फ़ोन पर बताया कि वो ऐसे ठेकों के खिलाफ़ कार्यवाई करने में व्यस्त हैं लेकिन वो ना ही मिलने को तैयार हुए ना ही कोई और जानकारी देने को.

माना जा रहा है कि मौत की मुख्य वजह रेक्टिफ़ाईड स्पिरिट से तैयार की हुई शराब है जिसकी खपत इस इलाके में बढी है. हालांकि प्रशासन का कहना है कि उसे विसरा रिपोर्ट का इंतज़ार है.

रेक्टिफ़ाइड स्पिरिट से शराब तैयार करना आसान है, इसे तैयार करने में कम समय लगता है जिसकी वजह से पुलिस का भी डर भी कम रहता है. आसपास के गाँव कस्वों में इसे 10 से 15 रुपए थैली के हिसाब से खरीदा जा सकता है.

इस घटना के बाद गाँववालों ने संकल्प किया है कि वहाँ कोई भी शराब नहीं पिएगा और किसी मौके पर भी शराब नहीं पी जाएगी. उनकी माँग है कि सरकार उनकी मदद करे औऱ दोषियों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई करे नहीं तो वो इस बारे में आवाज़ उठाएंगे औऱ रेल रोको आंदोलन शुरु करेंगे.

गाँव के लोगों की नाराज़गी मायावती सरकार से भी है. उनका कहना है कि वो लोग बसपा को वोट करते हैं औऱ अगर उनकी मदद नहीं की गई तो वो अगली बार से पार्टी को वोट नहीं देंगे.

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