'तिरुपति लड्डू' बना ब्रांड नाम

  • 16 सितंबर 2009
तिरुपति मंदिर
Image caption तिरुपति मंदिर दुनिया के सबसे धनी मंदिर ट्रस्टों में से है

तिरुपति लड्डू को अपना नाम संरक्षित रखने का भौगौलिक अधिकार मिल गया है.

इसका मतलब यह है कि तिरुपति मंदिर ट्रस्ट के अलावा और कोई भी अपने लड्डुओं को तिरुपति लड्डू के नाम से नहीं बेच पाएगा.

ऐसा आंध्रप्रदेश के वेंकटेश्वर मंदिर का संचालन करने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट को तिरुपति लड्डू का भौगोलिक संकेतक यानी जीआई प्रमाणपत्र मिलने के बाद संभव हो सका है.

लोकप्रिय वस्तुओं को ब्रांड नाम दिए जाने का चलन दुनिया भर में है. एक बार ब्रांड मिल जाने के बाद उसकी नकल करना क़ानूनन अपराध होता है.

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट ने तिरुपति लड्डू के लिए जीआई सर्टिफ़िकेट के लिए अर्ज़ी 31 मार्च 2008 में जमा करवाई थी.

चेन्नई स्थित ट्रेड मार्क एंड ज्योग्रोफ़िकल इंडिकेटर संस्था के सहायक रजिस्ट्रार जीएल वर्मा ने बताया, “ तिरुपति लड्डू एक जाना माना नाम है और इसके संरक्षण की अर्ज़ी मिलने के बाद इसे भौगोलिक संकेतक अधिनियम के तहत जीआई सर्टिफिकेट दिया गया है .”

जीएल वर्मा ने बताया, “तिरूपति लड़्डू कोई ब्रांड नाम नहीं है. लेकिन जीआई सर्टिफिकेट मिलने के बाद इस नाम के लड्डू सिर्फ वेंकटेश्वर मंदिर के साथ ही जुड़ गए हैं. भारत भर में अब कोई भी मिठाई की दुकान तिरुपति लड्डू का नाम अपने लड्डुओं के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकती. अगर कोई इसी नाम से लड़्डू बेचने की कोशिश करेगा तो उसके ख़िलाफ क़ानूनी कार्रवाई की जा सकती है.”

तिरुपति लड्डू के लिए जी आई प्रमाणपत्र की अर्ज़ी के आने के बाद उस पर फैसला एक 7 सदस्यीय समिति करती है.

जीएल वर्मा ने इस बारे में बताया, “ जीआई सिर्टिफिकेट की मांग की अर्ज़ी आने के बाद आपत्ति दर्ज करवाने के लिए लोगों को क़ानून के मुताबिक़ चार महीने का समय दिया गया, लेकिन किसी ने भी इस पर अपना एतराज़ दर्ज नहीं करवाया, इसलिए तिरुपति लड्डू को ये प्रमाणपत्र दे दिया गया. ”

चेन्नई स्थित ट्रेड मार्क और भौगोलिक संकेतक संस्था ने इससे पहले भी 117 जीआई प्रमाणपत्र दिए हैं.

जीएल वर्मा ने बताया कि अगर किसी भी लोकप्रिय और जानी मानी वस्तु के लिए भौगोलिक संकेतक की मांग की अर्ज़ी आती है, तो संस्था इसी प्रक्रिया से इस पर विचार करेगी.

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