ताकि फिर कोई ग़ुलाम ना बने...

बाल तस्करी का शिकार हुई रानी
Image caption रानी कहती हैं कि भारत में भी बाल तस्करी के ख़िलाफ़ कड़ा क़ानून बनना चाहिए.

बाल तस्करी का शिकार बनने वाली रानी चाहती हैं कि अब किसी भी बच्चे को यातना और ग़ुलामी के उस दौर से नहीं गुज़रना पड़े, जिससे वह ख़ुद गुज़री हैं, इसलिए वह पूरी दुनिया में घूम कर बाल तस्करी के ख़िलाफ़ अनूठी मुहिम चला रही है.

तस्करी के शिकार बच्चों के जीवन में खुशियां लाने के मक़सद से रानी ने अपने पति ट्रांग हांग के साथ ट्रॉनी फाउंडेशन की स्थापना की है. रानी अब अमरीकी नागरिक हैं और फ़िलहाल अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रतिनिध के तौर पर भारत के दौरे पर हैं.

रानी चाहती हैं कि हर देश में बाल तस्करी के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनें. रानी कहती हैं, "मैं दिल्ली में मंत्रियों और सांसदों से मुलाक़ात करूंगी. यहां बाल तस्करी के ख़िलाफ़ तुरंत एक क़ानून की ज़रूरत है."

कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए रानी की आंखों से लगातार आंसू गिर रहे थे.

रानी बताती हैं, "मेरा जन्म केरल में हुआ था. जब मैं सात साल की थी तो मेरे पिता काफ़ी बीमार हो गए और उसके बाद के हालात में मैं बाल तस्करों के हत्थे चढ़ गई थी."

उसी समय मेरे गांव के एक व्यक्ति ने सहृदयता दिखाते हुए मेरी मां से मेरी पढ़ाई और खाने-पीने का ख़र्च उठाने का प्रस्ताव किया लेकिन उसने तमिलनाडु में मुझे तस्करों के हाथों बेच दिया.’

वहां रानी को इतने अत्याचार झेलने पड़े कि उसकी याददाश्त ही चली गई. एक साल तक ग़ुलामी का जीवन बिताने के बाद एक अमरीकी दंपति ने रानी को गोद ले लिया.

बचपन की याद

अमरीका जा कर वह अपना बचपन भूल गईं. कोई दस साल पहले छुट्टियों में भारत आने पर उन्हें अचानक अपना बचपन याद आ गया. उसके बाद ही रानी ने तस्करी के शिकार बच्चों के जीवन में खुशियां लाने का फैसला किया.

Image caption रानी कहती हैं कि पिता की मौत के बाद एक व्यक्ति ने उनके साथ जज़्बाती छल किया

अपने पति ट्रांग हांग के साथ मिल कर रानी ने एक संगठन बनाया. दिलचस्प बात यह है कि ट्रांग भी बाल तस्करी के शिकार हैं.

रानी कहती हैं, "देश और विदेश में बच्चों को गोद लेने के मामलों पर नज़र रखने के लिए समुचित एजेंसियों का गठन किया जाना चाहिए. तस्करी के शिकार ज़्यादातर बच्चों और महिलाओं को विदेशों में बेच दिया जाता है जहां वे एक ग़ुलाम के तौर पर पूरा जीवन बिताने को मजबूर हैं. उनमें से अनेक को वेश्यावृत्ति के दलदल में भी ढकेल दिया जाता है."

रानी कहती हैं, "मैंने ग़ुलामी का दुख भोगा है और मैं नहीं चाहती कि किसी को भी उस दौर से गुज़रना पड़े. इसलिए हमने पूरी दुनिया में बाल तस्करी के ख़िलाफ़ जागरूकता फैलाने और हर देश में इसके ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनवाने की मुहिम शुरू की है."

रानी के संगठन के दबाव में ही वर्ष 2002 में अमरीका में बाल तस्करी के ख़िलाफ़ एक क़ानून बनाया गया. रानी चाहती हैं कि उनकी कहानी सुनकर महिलाओं और बच्चों को प्रेरणा मिले ताकि किसी मासूम को ग़ुलामी का जीवन नहीं बिताना पड़े.

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