ताज कॉरिडोर मामला फिर उठा

  • 18 सितंबर 2009
मायावती
Image caption मायावती की मुसीबतें बढ़ सकती हैं

उत्तर प्रदेश में ताज कॉरीडोर भ्रष्टाचार मामला मुख्यमंत्री मायावती का पीछा नहीं छोड़ रहा है.

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में अब तीन जनहित याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है.

अदालत ने मुख्यमंत्री मायावती और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी को नोटिस भेजकर पूछा है कि उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के इस मामले में मुकदमा क्यों न चलाया जाए.

इस ताज़ा मामले की सुनवाई नवंबर में शुरू होने वाली है.

आगरा में ताजमहल के आसपास व्यावसायिक परिसर बनाने और पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाओं के निर्माण की योजना को मायावती ने 2002 में मंज़ूर किया था तभी से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं.

इस प्रस्तावित निर्माण के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को रोकने और पूरी जाँच किए जाने का आदेश दिया था.

अदालत के आदेश के बाद जब केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने तफ़्तीश की तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की बात सामने आई. सीबीआई ने मुख्यमंत्री मायावती, उनके मंत्रिमंडल से सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी और अन्य कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाख़िल किया.

एक स्थानीय अदालत ने इस बिना पर मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया कि इसके लिए राज्यपाल से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है.

2007 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टी राजेश्वर राव ने मायावती के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाए जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, यह उस समय की बात है जबकि मायावती और कांग्रेस पार्टी के रिश्ते मधुर थे.

इसके बाद मायावती ने राहत की साँस ली होगी लेकिन हाइकोर्ट में मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिए जाने का यही मतलब है कि मामला दोबारा खुल गया है.

मायावती के निकट सहयोगी और उनके वकील सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा है कि हाइकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

हाल ही में सीबीआई ने कहा था कि उसने एक नया आरोपपत्र तैयार किया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि मायावती और उनके सहयोगियों ने भ्रष्ट तरीक़े अपनाकर भारी संपत्ति जमा की है.

मायावती अपनी सफ़ाई में पहले भी कह चुकी हैं कि उन्हें ये दौलत उनके समर्थकों ने उपहार और चंदे के तौर पर भेंट की है.

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