भाजपा पर बरसे जसवंत सिंह

  • 23 सितंबर 2009
जसवंत सिंह
Image caption जिन्ना पर लिखी किताब को लेकर पार्टी ने निकाला

भाजपा से निष्कासित पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह की नजर में भारत में सभी राजनैतिक पार्टिया जातियों की जकड में है.ये दल या तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हो गए है,या जातियों के 'मठ ' बन गए है.बीजेपी भी एक तरह का मठ बन गई है.

उन्होंने कहा, ''भाजपा में वापस लोटने का कोई सवाल ही नहीं है.ना मैं और ना ही मेरे परिवार का कोई सदस्य भाजपा का सदस्य है.'' इनमें पूर्व सांसद और में पुत्र मानवेन्द्र भी शामिल है.

जसवंत सिंह निष्कासन के बाद पहली बार अपने गृह राज्य राजस्थान आए और पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के निवास स्थान पर अपने समर्थको से मिले.

जहां ये बैठक हुई, वहां राजपूत समाज के काफी सदस्य मौजूद थे.

लेकिन शेखावत ने एक बुजुर्ग राजनैतिक अभिभावक की तरह भूमिका अदा की और जसवंत सिंह को सलाह दी कि इतना कठोर भी नहीं होना चाहिए कि भाजपा में कभी न लौटने की शपथ ले लें.

शेखावत ने कहा कि अगर किसी राजनैतिक दल ने कोई गलती की है तो उस गलती को उसके सदस्य ही सुधार सकते है.

इससे पहले जसवंत सिंह ने भाजपा में अपने आगमन की गाथा बयां की और कहा की शेखावत ही उन्हें इस पार्टी में लाए थे.

उन्होंने कहा कि अगर कोई गलती हो तो शेखावत ही कह सकते है,किसी और को ये हक़ नहीं है.

जसवंत सिंह ने कहा कि अब भाजपा में लौटने का कोई सवाल ही नहीं है. ना कांग्रेस उनके लिए है.आगे क्या होगा,आप इंतजार कीजिये.

उन्होंने अपने समुदाय का जिक्र किया और कहा ये पहला मौका है जब केंद्र सरकार में समाज का कोई नुमाइंदा ही नहीं है.

अपने पार्टी से निष्कासन पर जसवंत सिंह ने कहा ये स्वाभिमान और अभिमान के बीच की बात है.

आडवाणी के इस वक्तव्य पर कि जसवंत सिंह के निष्कासन का वे विरोध कर रहे थे, उन्होंने कहा कि ये बात वो इतनी देर बाद क्यों कर रहे हैं.

जसवंत सिंह अगले एक हफ्ते तक राजस्थान का दौरा करेंगे. वे अपने गृह जिले बाड़मेर और जोधपुर भी जायेंगे.

प्रेक्षकों का कहना है कि दरसल जसवंत सिंह पार्टी के परे हो जाने के बाद अपनी ताकत तौल रहे है.

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