नौकरी के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट

अब नेपाल, बांग्लादेश और आयरलैंड से मेडिकल स्नातक डिग्री ले चुके छात्रों को भी अब भारत में नौकरी के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट देना होगा.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़ इन देशों के छात्रों को अब भारत आकर मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया के स्क्रीनिंग टेस्ट से गुज़रना होगा.

दरअसल संसद ने वर्ष 2001 में मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) के क़ानून में बदलाव कर स्क्रीनिंग टेस्ट का नया प्रावधान जोड़ा था.

इसके तहत किसी भी देश से भारत आने वाले मेडिकल छात्रों को मेडिकल प्रैक्टिस करने या फिर किसी अस्पताल में नौकरी पाने के लिए पहले परीक्षा देना पडती थी.

लेकिन नेपाल, आयरलैंड और बांग्लादेश से भारत की सहमति होने के कारण वहाँ के मेडिकल छात्र सीधे ही भारत आकर काम कर सकते थे.

लेकिन जब इन देशों से भी शिक्षा के स्तर में गिरावट की शिकायतें आने लगी तो भारत को इन तीनों देशों के साथ बनी सहमति को तोडना पड़ा.

आकलन

मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष डाक्टर केतन देसाई ने बताया कि नेपाल की शिकायतों का आकलन करने के बाद ही ये फ़ैसला किया गया है.

उन्होंने बताया, "जब नेपाल के दो तीन कॉलेजों की शिकायतें भारत सरकार और एमसीआई के पास आई, तो सरकार ने पत्र लिखकर एमसीआई को इन शिकायतों का आकलन करने के लिए कहा. इस आकलन रिपोर्ट में कई अनियमितताएँ और कमियाँ पाई गयी. इसके बाद काउंसिल ने ये फ़ैसला लिया कि इन्हें भी स्क्रीनिंग टेस्ट देना होगा. इन छात्रों की दलील दी थी कि सहमति के अनुसार ये अवैध है. लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में एमसीआई के इस फ़ैसले को सही माना.''

इससे पहले विदेशों में जितने भी कॉलेजों को एमसीआई ने मान्यता दी थी, उन कॉलेजों के मेडिकल छात्र सीधे आकर भारत में नौकरी पा सकते थे.

लेकिन वो शिक्षा के सही मानदंड अपना रहे हैं या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही थी. पूर्व सोवियत संघ के देशों के लगभग 28 कॉलेजों की शिकायत आने के बाद इन कॉलेजों के आकलन के लिए भारत से 1999 में एमसीआई ने अपनी 14 सदस्यीय टीम भेजी.

इस टीम की रिपोर्ट में इन कॉलेजों में शिक्षा का स्तर संतोषजनक नहीं पाया गया. इसके बाद एमसीआई ने इन मेडिकल कॉलेजों की मान्यता ख़त्म करने की सिफ़ारिश की.

इसके बाद एमसीआई और सरकार के बीच कई बैठकों का दौर चला और ये फ़ैसला लिया गया कि स्क्रीनिंग टेस्ट लिया जाना चाहिए. अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भी इसी तरह की परीक्षा से छात्रों को गुज़रना पडता है.

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