मृतकों की संख्या 36 हुई

  • 25 सितंबर 2009

छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में बुधवार को भारत एल्युमिनियम कंपनी (बाल्को) के एक निर्माणाधीन बिजलीघर की चिमनी गिरने से मरनेवालों की संख्या 36 तक पहुंच गई है. ये घटना बुधवार दोपहर को हुई थी.

ज़िला मजिस्ट्रेट अशोक अग्रवाल ने इसकी पुष्टी करते हुए कहा है कि मलबे के साफ़ करने के प्रयास अब भी जारी हैं.

इससे पहले बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने जानकारी दी थी कि दुर्घटना के समय प्लांट में तीन हज़ार लोग काम कर रहे थे लेकिन ये कहना मुश्किल है कि चिमनी में कितने लोग थे.

कोरबा के सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन के नेता सोमनाथ बनर्जी ने बीबीसी को बताया है कि मारे जाने वाले अधिकतर मज़दूर बिहार के छपरा और सिवान से थे.

जो मज़दूर लापता हैं और अन्य जो मारे गए हैं, उनके परिवार बोल्को के बिजलीघर पर जमा हैं.

मुआवज़े का ऐलान

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मारे गए मज़ूदरों के लिए एक एक लाख रूपए के मुआवज़े का ऐलान किया है और बाल्को प्रबंधन के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है.

अभी चिमनी के गिरने के कारणों का ठीक-ठीक पता नहीं चला है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि बरसात के बीच बिजली गिरने से यह घटना हुई है.

बाल्को ने इसके निर्माण की ज़िम्मेदारी चीनी कंपनी सेप्को को दी थी और सेप्को ने जीडीसीएल नाम की कंपनी को निर्माणकार्य का ठेका दिया हुआ है.

चिमनी का निर्माण 275 मीटर तक होना था और इसका निर्माण 220 मीटर तक हो चुका था. चिमनी का घेरा क़रीब 50 मीटर का था.

घटना के समय बरसात के साथ आँधी भी चल रही थी जिससे बचने के लिए बहुत से मज़दूर एक कैंटीन और स्टोर रूम में चले गए थे. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चिमनी इस कैंटीन और स्टोर रुम के ऊपर ही गिर गई.

ग़ौरतलब है कि बाल्को पहले सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी थी लेकिन वर्ष 2002 में इसका विनिवेश कर दिया गया था. वेदांता ग्रुप की स्टरलाइट कंपनी ने इसे ख़रीद लिया था.