आईआईटी प्रोफ़ेसर भूख हड़ताल पर

Image caption आईआईटी रूड़की

भारत के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी यानी प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों के प्रोफ़ेसर वेतन ढाँचे को लेकर गुरुवार को भूख हड़ताल कर रहे हैं.हालांकि प्रोफ़ेसर विद्यार्थियों की कक्षाएँ लेते रहेंगे.

भूख हड़ताल का फ़ैसला 21 सितंबर को आईटीटी खड़गपुर में बैठक के दौरान लिया गया था.

ऑल इंडिया इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेकनॉलॉजी फ़ेकल्टी फ़ेडरेशन की अध्यक्ष एम.थेनमोज़ी ने कहना है कि छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के कारण आईआईटी की प्रतिष्ठा पर असर पड़ा है.

नए वेतन ढाँचे में लेक्चरार और पोस्ट डॉक्ट्रल फ़ेलोज़ के पद को एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर का नाम दे दिया गया है जिन्हें अनुबंध की शर्तों के मुताबिक नियुक्त किया जाएगा.

इसके अलावा सिनियर ग्रेड में प्रोफ़ेसरों की पद उन्नति पर भी 40 फ़ीसदी की सीमा लगा दी गई है.

प्रोफ़ेसरों को पद उन्नति पर किसी तरह की सीमा लगाए जाने पर आपत्ति है.

माँगे

एम.थेनमोज़ी का कहना है, "आईटीटी के सभी प्रोफ़ेसर इस सबसे काफ़ी दुखी हैं. ये उंची वेतन दरें को लेकर नहीं है. आप मूल रूप से आईटीटी की पूरी प्रणाली, संस्कृति और विश्वनियता की बात कर रहे हैं और नए वेतन ढाँचे से ये सब कुछ प्रभावित हो रहा है."

वहीं मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने आईआईटी प्रोफ़ेसरों के भूख हड़ताल जाने के फ़ैसला पर अपनी असहमति जताई है और कहा है कि ये सही क़दम नहीं है.

नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए सिब्बल ने कहा, हम ये उम्मीद नहीं करते है कि ऐसे लोग भूख हड़ताल पर जाएँ जो भविष्य में नोबेल पुरस्कार के दावेदार हो सकते हैं. इन लोगों में तो ज्ञान की भूख होनी चाहिए.

करीब 1300 प्रोफ़ेसरों ने सरकार को एक अक्तूबर तक का समय दिया है ताकि वेतन ढाँचे को बदला जा सके.

वहीं दो आईआईटी संस्थानों के निदेशकों प्रोफ़सर संजय धांडे(कानपुर) और प्रो. गौतम बरुआ (गुवाहटी) ने प्रोफ़ेसरों से अपील की है कि वो अपने फ़ैसले पर दोबारा विचार करें.

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