'पोखरण से प्रतिरोधक क्षमता हासिल हुई'

  • 24 सितंबर 2009
पोखरण परीक्षण
Image caption काकोदकर ने परीक्षण पर विवादों को ख़ारिज किया

परमाणु ऊर्जा आयोग के चेयरमैन अनिल काकोदकर ने वर्ष 1998 में हुए हाइड्रोजन बम परीक्षण की सफलता पर उठाए जा रहे सवालों को ख़ारिज कर दिया है.

उन्होंने कहा कि उस परीक्षण से वैज्ञानिकों ने 200 किलोटन तक प्रतिरोधक क्षमता हासिल करने में सफलता हासिल की थी.

मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए काकोदकर ने कहा, "एक बार फिर मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहता हूँ कि वर्ष 1998 में हुआ परमाणु परीक्षण पूरी तरह सफल था. उस परीक्षण से हम जो भी हासिल करना चाहते थे, हमें हासिल हुआ."

उन्होंने कहा कि इस परीक्षण से हमें परमाणु विखंडन और परमाणु ताप पर आधारित हथियार प्रणाली विकसित करने की क्षमता हासिल हुई है, जो साधारण से 200 किलोटन तक हो सकता है.

वर्ष 1998 में हुए परमाणु परीक्षण के समय अनिल काकोदकर भाभा परमाणु शोध केंद्र के निदेशक थे. उन्होंने वर्ष 1998 में पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण पर उठे विवादों को ग़ैर ज़रूरी बताया.

दावा

पिछले दिनों रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वैज्ञानिक के संथानम ने दावा किया था हाइड्रोजन बम का परीक्षण नाकाम हुआ था.

उन्होंने कहा था कि परमाणु तापीय परीक्षण ने उम्मीद से कम नतीजे दिए थे. इसके बाद ही विवाद खड़ा हो गया था.

उन्होंने परमाणु परीक्षण के नतीजों पर विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति से जाँच कराने की मांग भी की थी.

इस संवाददाता सम्मेलन में केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार आर चिदंबरम ने पोखरण-2 परीक्षण के नतीजों पर विस्तृत जानकारी पेश की.

आर चिदंबरम वर्ष 1998 में परमाणु ऊर्जा आयोग के चेयरमैन थे. उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में हुए परीक्षण हथियारों से जुड़ा था इसलिए हमने कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ अपने पास ही रखी हैं.

उन्होंने परीक्षण के नतीजों पर खड़े हुए विवाद को ग़ैरज़रूरी बताया.

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