'सवाल पैसे का नहीं, ख़ानदानी गौरव का'

यूँ तो हर त्योहार खुशियों की सौगात लेकर आता है मगर इस बार राजस्थान में इकलौती मुस्लिम रियासत रहे टोंक में ईद का मौका पूर्व नवाब खानदान के कोई 50 से ज़्यादा लोगों के लिए खुशियों का अलग ही तोहफ़ा लेकर आया.

सरकार ने इन परिवारों के लिए खानदानी भत्ते की बढ़ी हुई राशि स्वीकृत कर दी है. सरकार ने इन पूर्व नवाब खानदान के लोगों के लिए अपने बजट से कोई एक करोड़, 16 लाख रूपए स्वीक्रत किए हैं.

नवाब खानदान के लोगों को इसके लिए लंबी क़ानूनी लडाई लड़नी पड़ी और अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा था. अदालत ने आदेश दिया था कि इस खानदानी भत्ते की रकम किसी को भी 100 रूपए से कम नहीं मिले.

सरकार इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट तक गई मगर फतह तो इन खानदानों को ही नसीब हुई. लिहाजा सरकार ने भी बकाया भुगतान के साथ कोई एक करोड़ और 16 लाख रूपए टोंक भेज दिए है.

टोंक के जिला कोषाधिकारी ओपी बैरवा ने बीबीसी को बताया कि सोमवार से इन लोगों को भुगतान के चेक मिलने शुरु हो जाएंगे.

ओपी बैरवा ने बताया, ''हम चेक बना रहे है. इस तरह कोई 600 के क़रीब लोग हैं जिनको ये बढ़ी हुई राशि मिलेगी. इनमें कुछ को बहुत ही कम मासिक रकम मिलती थी, अब रकम बढ़ी है तो इन लोगों का उतसाह भी बढ़ा है. किसी को एक रुपया मिलता था तो किसी को 75 पैसा."

टोंक के पूर्व नवाब खानदान के वारिसों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था अंजुमन सोसाइटी खानदान ऐ अमीरिया इस पुरे मामले को अदालत तक ले गई. राजस्थान के हाईकोर्ट ने अंजुमन की बात सुनी और इस भत्ते को बढ़ाकर कम से कम 100 रूपए कर दिया.

अंजुमन के पूर्व सचिव साहिबजादा अस्मत अली खान कहते हैं कि ये एक तरह का सम्मान है .पहले उन्हें महज 13 रुपए, 78 पैसे मासिक रूप से मिलते थे. अब उन्हें भी कम से कम 100 रूपए मिलेंगे. इनमें कुछ ऐसे हैं जो ये मासिक रकम लेने सरकारी दफ्तर जाते तो उससे ज्यादा राशि आने जाने में खर्च हो जाती थी .मगर उन्हें लगता है की ये उनके सम्मान की बात है क्योंकि इस छोटी सी राशि में वे अपने पुरखों के गौरव की झलक देख लेते हैं.