'एनपीटी पर रुख़ में बदलाव नहीं'

Image caption एसएम कृष्णा ने कहा है कि भारत के रुख़ में बदलाव की गुंजाइश नहीं है.

भारत ने दोहराया है कि वो परमाणु असप्रसार संधि(एनपीटी) और सीटीबीटी पर उनके मौजूदा रुप में हस्ताक्षर नहीं करेगा.

हालांकि भारत ने यह भी कहा है कि परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व बनाने के प्रति वो वचनबद्ध है.

न्यूयॉर्क में भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा, "भारत ने व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि यानी सीटीबीटी पर एक रुख क़ायम किया हुआ है और इसमें बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है- जब तक भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए उचित क़दम नहीं उठाए जाते.”

दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने निशस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है. इसी के बाद भारत ने अपना पक्ष एक बार फिर स्पष्ट किया है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के इस विशेष सम्मेलन की स्वयं अध्यक्षता की थी.

'भेदभावपूर्ण'

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विशेष दूत शयाम शरण ने भी पिट्सबर्ग में पत्रकारों से कहा है कि भारत एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करेगा.

संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में महासचिव बान की मून ने भारत समेत नौ देशों से कहा है कि वे एनपीटी को मंज़ूरी दे दें ताकि इसे लागू किया जा सके.

बान की मून ने कहा था कि विश्व को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए सीटीबीटी एक बुनियादी कड़ी है.

प्रस्ताव 1887 के तहत उन सभी देशों से परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है, जिन्होंने अभी तक इस संधि को स्वीकार नहीं किया है.

भारत का रुख रहा है कि परमाणु असप्रसार संधि भेदभावपूर्ण है और ये परमाणु शक्ति वाले देशों के पक्ष में है. भारत ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वो ऐसी संधि को स्वीकार नहीं कर सकता जो उसके राष्ट्रीय हितों के ख़िलाफ़ हो.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत हरदीप सिंह पुरी ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि परमाणु हथियार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं और आगे भी रहेंगे जब तक विश्व में परमाणु निशस्त्रीकरण नहीं हो जाता.

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