माओवादियों ने हमले की ज़िम्मेदारी ली

बस्तर
Image caption बस्तर का इलाक़ा माओवादियों का गढ़ माना जाता है

छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले में माओवादी हमले में बस्तर के सांसद के एक पुत्र की मौत हो गई है जबकि एक अन्य पुत्र ज़ख़्मी हो गए हैं.

माओवादी नेता कुटेश्वर राव उर्फ़ कृष्ण जी ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया है कि सांसद के बेटों पर हमला उन्हें के संगठन ने किया है. इससे पहले पुलिस ने भी हमले के पीछे माओवादियों के हाथ होने की शंका ज़ाहिर की थी.

बस्तर में स्थानीय संवाददाता करीमुद्दीन के अनुसार ये हमला शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के सांसद बलिराम कश्पय के पैतृक गाँव पेड़ागुड़ा में एक मंदिर में हुआ, जहाँ उनके तीन पुत्र पूजा करने के लिए गए थे.

हमले से कुछ समय पहले सांसद के एक पुत्र और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री केदारनाथ कश्पय मंदिर परिसर से निकल चुके थे. उन्हें ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है और सुरक्षा क़ाफि़ले के गुज़र जाने के तुरंत बाद हमलावार ने तानसेन कश्पय और दिनेश कश्पय पर धावा बोल दिया.

दिनेश कश्पय को जहाँ पीठ पर गोली लगी वहीं तानसेन कश्पय को माथे पर गोली लगी. घायल अवस्था में दोनों भाईयों को ज़िले के जगधपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए लाया गया, जहाँ बाद मे तानसेन कश्पय ने दम तोड़ दिया.

बस्तर के पुलिस अधीक्षक पी सुंदर राज का कहना है कि दिनेश कशपय की हालत ख़तरे से बाहर है.

प्रभावशाली परिवार

ग़ौरतलब है कि बलिराम कश्पय जहाँ सांसद हैं वहीं केदारनाथ कश्पय राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री, घायल दिनेश कश्पय बस्तर ज़िला राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष हैं जबकि तानसेन कश्पय बस्तर ज़िला पंचायत के अध्यक्ष थे. बलिराम का परिवार इलाक़े में एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के तौर पर जाना जाता है.

बलिराम कश्पय राज्य में माओवादियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे आंदोलन सलवा जुड़ुम का खुला समर्थन करतें हैं और माना ज रहा है कि इसी कारण उनका परिवार माओवादियों के निशाने पर है.

सलवा जुडुम को छत्तीसगढ़ सरकार का समर्थन मिलने का आरोप लगता रहा है. लेकिन सरकार ने हमेशा इससे इनकार किया है. जबकि मानवाधिकार संस्थाएं सलवा जुडुम के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की माँग करते आए हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चार हमलावर साइकल से मंदिर में आए थे और पूजा में शामिल हो गए और काफ़ी नज़दीक से गोली मारी गई.

गाँव में दहशत का माहौल है और स्थिति तनावपूर्ण है. ख़बरें हैं कि गाँव वालों ने कुछ संदिग्ध हमलावरों को पकड़ रखा है.

छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाक़ा माओवादियों का गढ़ माना जाता है और पुलिस ने दावा है कि ये हमला माओवादियों ने किया है.

स्थिति का जायज़ा लेने के लिए बस्तर ज़ोन के इंस्पेकटर जनरल तेजी लाल घटना स्थल के लिए रवाना हो गए हैं.

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