मसूरी को बचाने के लिए 'इको-टैक्स'

  • 26 सितंबर 2009

अगली बार जब आप मसूरी घूमने जाएँ तो आपको कुछ अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है.

Image caption मसूरी दशकों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है

पहाड़ो की रानी कही जाने वाली मसूरी में छुट्टियां मनाने की योजना बना रहे सैलानी को इस ख़बर से पल भर के लिए मायूस हो सकती है.

लेकिन उत्तराखंड की सरकार का कहना है कि ये कर 'इको-टैक्स' है और मसूरी की ख़ूबसूरत वादियों को बचाने के लिए ही यह कर लगाया जा रहा है. मसूरी की नगरपालिका ने ये फ़ैसला कर लिया है और इसे जल्द ही लागू कर दिया जाएगा.

देहरादून से मसूरी के रास्ते में, मसूरी के प्रवेश द्वार समझे जानेवाली कोल्हू खेत नामक जगह पर ये टैक्स वसूल किया जाएगा. बस या कार वाहन के मुताबिक सैलानियों को हर बार मसूरी से गुज़रते वक़्त 100 से 200 रुपए देने पड़ सकते हैं.

मसूरी नगरपालिका के अध्यक्ष ओपी उनियाल का कहना है, "मसूरी में पर्यटकों की संख्या बहुत बढ़ गई है और मसूरी के जंगल, नाले-खाले सभी कूड़े-कचरे से भर गये हैं. मसूरी के पर्यावरण का संरक्षण करना बहुत ज़रूरी हो गया है और ये टैक्स इसीलिए वसूला जा रहा है."

एक जमाने में चूने की खानों और पेड़ों के काटे जाने से नंगी और उजाड़ हो चुकी मसूरी की पहाड़ियों को सेना के विशेष दस्ते 'इको-टास्क फ़ोर्स' ने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करके बचाया था.

'कारोबार पर असर'

अधिकारियों के अनुसार इस पैसे से मसूरी में कचरे का निपटारा, वृक्षारोपण, पुरानी विरासतों का रख-रखाव, सैलानियों के लिये सुविधाएँ, सौंदर्यीकरण और साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था की जाएगी.

Image caption आशांका जताई जा रही है कि इस टैक्स से कारोबार पर बुरा असर पड़ सकता है

हालांकि इस इको टैक्स की मंशा पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं और ये आशंका भी ज़ाहिर की जा रही है कि इससे पर्यटन के कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा.

चंडीगढ़ से मसूरी घूमने आए अंगद कहते हैं, "मुझे टैक्स देने में कोई परेशानी नहीं है लेकिन इस बात की गारंटी होनी चाहिए कि इस पैसे का उपयोग मसूरी के विकास में ही किया जाए."

उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यपाल कोचर कहते हैं, "इससे बहुत समस्याएं होंगी. मसूरी में पहले से ही इतना ट्रैफ़िक है और इस टैक्स वसूली से सैलानियों की परेशानी और बढ़ जाएगी. अगर वो परेशान होंगे और लौटकर इसके बारे में बताएंगे तो नया टूरिस्ट यहां आने से कतराएगा."

वे कहते हैं, "इससे बिज़नेस घट जाएगा. पहले सुविधाएं तो दो, फिर टैक्स लगाओ. टूरिस्ट महत्वपूर्ण है टैक्स नहीं."

इसके जवाब में ओपी उनियाल का कहना है, "चाहे यूरोप के किसी देश में चले जाइए या थाइलैंड या सिंगापुर- हर 10 किलोमीटर की दूरी पर पाँच डॉलर का टैक्स देना होता है. फिर अगर मसूरी की बेहतरी के लिए कोई व्यवस्था लागू की जा रही है तो इसका इतना विरोध क्यों हो रही है?"

सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस फ़ैसले के गुण-दोष पर लंबी बहस के बाद इको-टैक्स वसूलने का निर्णय लिया गया क्योंकि मसूरी को बचाने का यही एक रास्ता है और ये सख़्ती से लागू होगा.

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