कुल्हाड़ी एके-47 पर भारी पड़ी

कश्मीर पुलिस
Image caption कश्मीर पुलिस ने रुख़साना के परिवार को सुरक्षा देने की बात की है

“मेरी माँ बाप को बेरहमी के साथ मारा जा रहा था, मैं अपने माता-पिता को पिटता नहीं देख सकी और एक चरमपंथी पर कूद पड़ी जबकि मेरे भाई ने पीछे से आकर उसे कुल्हाड़ी मारी.”

ये कहानी नहीं बल्कि एक हक़ीक़त है जो 10वीं के बाद पढ़ाई जारी न रख सकने वाली 18 वर्षीय रुख़साना ने राजौरी से बीबीसी को फ़ोन पर बताई.

चरमपंथ से जूझते भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के एक सूदूर पहाड़ी गांव में भाई और बहन ने जांबाज़ी का प्रदर्शन करते हुए एक चरमपंथी को मार डाला और दूसरे को घायल कर दिया. ये चरमपंथी उनके घर घुस आए थे और उनके माता-पिता की पिटाई कर रहे थे.

पुलिस के अनुसार कश्मीर के राजौरी ज़िले के सूदूर पहाड़ी गांव कालसी के एक निवासी नूर हुसैन के घर में तीन चरमपंथी घुस आए. यह स्थान जम्मू से 180 किलो-मीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है.

पुलिस ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिक और लश्करे-तैबा कमांडर अबू ओसामा के नेतृत्व में इस घर में घुस आने वाले चरमपंथियों ने नूर हुसैन और उनकी पत्नी की पिटाई शुरू कर दी जबकि उनकी बेटी रुख़साना और बेटा ऐजाज़ (19) चारपाई के नीचे छुपे हुए थे.

रुख़साना ने बताया कि जब हम लोगों से अपने मां-बाप की पिटाई नहीं देखी गई तो हम उन पर टूट पड़े. उन लोगों ने एक चरमपंथी की एके-47 छीन ली और उसे मार डाला. उन्होंने दूसरे चरमपंथी पर भी निशाना लगाया वह घायल हो गया लेकिन अपने दूसरे साथी के साथ भाग गया.

अनूठी मिसाल

स्थानीय लोगों ने बताया कि ये चरमपंथी रुख़साना को तलाश कर रहे थे और उससे ज़बर्दस्ती शादी करना चाहते थे.

राजौरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शफ़क़त वताली ने कहा कि वे चरमपंथी उस लड़की (रुख़साना) को तलाश कर रहे थे जिसका उसके माँ-बाप विरोध कर रहे थे.

शफ़क़त ने कहा, बहादुर बच्चों की कुल्हाड़ी ने चरमपंथियों की एके-47 बंदूक़ को हरा दिया.

पुलिस ख़ून के निशानों के सहारे भाग जाने वाले चरमपंथियों की तलाश में निकल पड़ी है.

पुलिस ने बताया कि ये चरमपंथी पाकिस्तानी संगठन लश्कर-ए-तैबा से थे और मारा जाने वाला कमांडर पिछले पांच वर्षों से इस इलाक़े में सक्रिय था.

वताली ने कहा कि रुख़साने के परिवार को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई है. पुलिस के अधिकारियों ने रुख़साना की हिम्मत की दाद दी है. पुलिस महानिदेशक कुलदीप खोडा ने रुख़साना को विशेष संदेश में बधाई दी है.

एसएसपी शफ़क़त ने कहा, आम तौर पर चरमपंथी लोगों के घरों में घुस आया करते थे लेकिन पहली बार घर वालों की ओर से उनके ख़िलाफ़ कारवाई की गई है. ये एक अनूठा मामला है.

उन्होंने ये भी कहा कि अन्य लोगों को भी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ आना चाहिए और इन बच्चों की मिसाल को अपनाना चाहिए.

उन्होंने ये भी कहा कि उन चरमपंथियों के सिर पर जो पुरस्कार राशि होगी वह इन बच्चों को दी जाएगी और उन्हें जल्द ही पुरस्कृत किया जाएगा.

शफ़क़त वताली ने कहा कि वह इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएंगे और 19 वर्षीय एजाज़ को पुलिस में नौकरी दिलाने की सिफ़ारिश करेंगे.

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