आईआईटी प्रोफ़ेसरों के साथ सुलह

  • 2 अक्तूबर 2009
कपिल सिब्बल
Image caption आईआईटी के प्रोफ़ेसरों ने मामला सुलझाने के लिए एक अक्टूबर तक का सरकार को समय दिया था

वेतन ढाँचे को लेकर महीने भर से सरकार के साथ चल रहा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी (आईआईटी) के प्रोफ़ेसरों का टकराव शुक्रवार को ख़त्म हो गया.

मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि अपवाद स्वरूप कुछ मामलों में पद्धति से हट कर विचार किया जा सकता है.

टकराव को ख़त्म करने के लिए आईआईटी के प्रोफ़ेसरों के प्रतिनिधि से मिलने के बाद सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, "आईआईटी के शिक्षकों और मानव संसाधन मंत्रालय के बीच वेतन ढाँचे को लेकर सारे मामले सुलझा लिए गए हैं. "

उन्होंने कहा कि वेतन ढाँचे को लेकर जो दिशानिर्देश जारी किए गए थे वे महज़ एक मानक है. सिब्बल ने कहा, "आईआईटी प्रणाली के तहत अपवादस्वरूप मानकों से अलग हटने की गुंजाइश है. हम फिर से किसी भी दिशानिर्देशों पर विचार कर सकते हैं."

ऑल इंडिया इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेकनॉलॉजी फ़ेकल्टी फ़ेडरेशन की अध्यक्ष एम.थेनमोज़ी ने कहा कि वे मानव संसाधन मंत्री सिब्बल के साथ बातचीत से खुश है. उन्होंने कहा, "मंत्री महोदय ने आईआईटी के मामले में मानकों से अलग हट कर विचार करने का आश्वासन दिया. इससे आईआईटी को आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी."

सीनियर ग्रेड में प्रोफ़ेसरों की पद उन्नति पर 40 फ़ीसदी की सीमा लगा दी गई है जिसे हटाने की माँग आईआईटी के प्रोफ़ेसर कर रहे थे.

प्रोफ़ेसरों को पद उन्नति पर किसी तरह की सीमा लगाए जाने पर भी आपत्ति थी.

आईआईटी के क़रीब डेढ़ हज़ार शिक्षकों ने 24 सितंबर को मानव संसाधन मंत्रालय के दिशानिर्देशों के विरोध में एक दिन की भूख हड़ताल की थी.प्रोफ़ेसरों ने सरकार को एक अक्तूबर तक का समय दिया था ताकि वेतन ढाँचे को बदला जा सके.

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