'नक्सली हिंसा छोड़ें तो वार्ता संभव'

पी चिदंबरम
Image caption चिदंबरम ने कश्मीर में तालेबान की घुसपैठ से इनकार किया है

भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने माओवादी विद्रोहियों से अपील की है कि वे हिंसा छोड़ कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में आएं.

बुधवार को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि नक्सली समस्या पिछले दस वर्षों में बढ़ी है और इससे निपटा जा सकता है.

उन्होंने कहा, "अगर नक्सली हिंसा छोड़ दें तो केंद्र सरकार उनसे बातचीत कर सकती है."

पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार को इस तरह की कोई जानकारी नहीं है कि नक्सलियों को विदेशों से पैसा मिलता है.

उन्होंने कहा कि अगर नक्सली हिंसा नहीं छोड़ते हैं तो सुरक्षाबल उनसे निपटने में सक्षम हैं. चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि अगर नक्सलियों ने हमला किया तो वायुसेना भी प्रतिरक्षा में कार्रवाई करेगी.

इससे पहले वायुसेना अध्यक्ष ने मीडिया से बात करते हुए माँग की थी कि अगर ऑपरेशन के दौरान नक्सली वायुसेना को निशाना बनाते हैं तो उन्हें भी जवाबी कार्रवाई की अनुमति होनी चाहिए.

'कश्मीर में तालेबान नहीं'

केंद्रीय गृह मंत्री ने इस बात से इनकार किया कि कश्मीर में तालेबान चरमपंथी घुसने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर में तालेबान चरमपंथियों की घुसपैठ की ख़बरें आधारहीन हैं. इनमें कोई दम नहीं है."

सुरक्षाबलों की तैयारी को पूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी तरह की घुसपैठ को रोकने में वे सक्षम हैं.

उधर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश करने वाले चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने से कतरा रहा है.

उनका कहना था, "मुख्य बात ये है कि मुंबई हमलों के बाद भी पाकिस्तान घुसपैठियों के ख़िलाफ़ सख़्ती बरतने की इच्छा नहीं रखता. कुल मिलाकर वो ज़्याद से ज़्यादा लोगों को भारतीय सीमा में धकेलना चाहते हैं."

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