असम में वन्यजीवों का शिकार जारी

गेंडा

पूर्वोत्तर राज्य असम में एक बार फिर से एक गेंडे और एक बाघ के मारे जाने की ख़बर आई है. यहां वन्यजीवों की संरक्षित जातियों को मारने का सिलसिला जारी है.

ताज़ा जानकारी के मुताबिक काज़ीरंगा वन्यक्षेत्र में एक सींग वाले एक दुर्लभ गेंडे और एक बाघ के मारे जाने का मामला सामने आया है.

इससे कुछ ही दिन पहले यानी 19 सितंबर को ही इसी वन्यक्षेत्र में एक गेंडा, एक बाघ और एक हाथी मरे पाए गए थे.

हालांकि वन अधिकारी डी कालिता ने बताया कि संभव है कि इस गेंडे के मौत बुढ़े हो जाने के कारण हुई हो लेकिन वन अधिकारी इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि अगर गेंडा स्वाभाविक मौत मरा है तो उसका सींग क्यों कटा हुआ है.

गेंडे के एक सींग की क़ीमत कालाबाज़ारी में 10 लाख रूपए से भी ज़्यादा है.

वन्यजीवों पर संकट

वन अधिकारी ने कहा, "जिस गेंडे की मौत हुई है, उसके शरीर पर गोली का कोई निशान नहीं पाया गया है और यह गेंडा बुड्ढा भी था लेकिन मैं यह बता सकने में असमर्थ हूँ कि उसकी सींग क्यों ग़ायब है."

अक्सर ऐसा होता है कि तस्कर बिजली काटे जाने के दौरान खंभों से तार काटकर उन रास्तों पर डाल देते हैं जिनका इस्तेमाल ये वन्यजीव आने-जाने के लिए करते हैं.

जब गेंडे इन रास्तों से गुज़रते हैं तो वे इन बिजली के तारों से चपेट में आ जाते हैं.

वन अधिकारी कालिता ने बताया कि इन जीवों की हत्या उनके सींगों, खाल या शरीर के अन्य हिस्सों के लिए की जाती है. कुछ मामलों में इन जीवों को ज़हर देकर मारने की बात भी सामने आई है.

असल में, कभी कभी यह लड़ाई मानव बनाम आम आदमी की भी बन जाती है. काज़ीरंगा के आसपास के गाँवों में रह रहे लोगों के लिए ये वन्यजीव नुकसानदेह भी साबित होते हैं.

परिणाम यह होता है कि गांववाले अपने बचाव के लिए भी इन जीवों को ज़हर देकर मारते हैं. पर पिछले दिनों हुई वन्यजीवों की हत्या में उनके कीमती हिस्से गायब पाए गए. इससे तस्करों पर शक की सुई जाती है.

इस वर्ष में अबतक 12 बाघ और छह गेंडे काज़ीरंगा में मारे जा चुके हैं. असम के बाकी हिस्सों में भी ऐसे मामले बढ़ रहे हैं.

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