हरियाणा नंबर वन?

जब से हरियाणा विधानसभा भंग हुई है, तभी से ही नंबर वन हरियाणा के स्लोगन रेडियो, टीवी, हर जगह नज़र आने लगे हैं.

कांग्रेस की कोशिश है ये संदेश पहुँचाने की है कि कांग्रेस के राज्य में हरियाणा ने आर्थिक तरक्की की है, किसानों के 1600 करोड़ के बिजली के बचे बिल माफ़ किए गए हैं, सेंट्रल लोन वेवर स्कीम के तहत 2,136 करोड़ रुपए के कर्ज़ भी माफ़ किए हैं, राज्य में 40,000 करोड़ का निवेश लाया गया है, 90,000 करोड़ रुपए की योजनाएं अभी पाइपलाइन में हैं और राज्य की रेटिंग नंबर वन है…

लेकिन कांग्रेस के आलोचक कहते हैं कि हरियाणा में सड़कें टूटी हुई हैं, स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी अनदेखी हुई है, मेवात के इलाके में भारी पिछड़ापन है, नौकरियों की किल्लत है, राज्य की कमाई गुड़गाँव और फ़रीदाबाद जैसे इलाकों पर निर्भर है जिन्हें राजधानी दिल्ली के पास होने का फ़ायदा मिला है.

अपने हरियाणा दौरे के दौरान हमने खुद पाया कि सड़कों की हालत में बहुत सुधार की आवश्यक्ता है और बिजली एक बड़ा मुद्दा है.

तो सवाल उठना लाज़मी है कि इतनी समस्याओं के बावजूद हरियाणा को नंबर वन का तमगा देने वाली कांग्रेस किस आधार पर दे रही है.

दावे कितने सच

रोहतक से सांसद और भूपिंदर सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा कहते हैं हरियाणा में राजनीतिक व्यवस्था बदलने की कोशिश हुई है. वे कहते हैं, “हमने ईमानदारी की राजनीति की नींव रखी है. सभी राज्यों के मुकाबले हरियाणा में विकास दर सबसे ज़्यादा है, हरियाणा में प्रति व्यक्ति निवेश सबसे ज़्यादा है, मगर ये बात सच है कि बहुत से काम अभी अधूरे हैं, और हमें इन कार्यों को पूरा करने के प्रयास करने हैं.”

उधर आलोचक कहते हैं कि गुड़गाँव और फ़रीदाबाद जैसे इलाकों में अगर जहाँ जहाँ विकास देखने को मिला भी है, वो विकास निजी कोशिशों की वजह से हुआ है ना कि सरकार की कोशिशों से.

आईएनएलडी महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पुत्र अजय चौटाला कहते हैं कि कांग्रेस ने लोगों को काम देने के जो वायदे किए थे, वो पूरे नहीं हुए. आलोचक ये भी कहते हैं राज्य आज भी बिजली और पानी की किल्लत से दोचार है.

आइएनएलडी के अख़बारों में जो विज्ञापन आ रहे हैं उनमें कहा जा रहा है कि सरकार के नंबर वन के दावे बकवास हैं, हरियाणा उनके राज्य के दौरान नंबर वन की स्थिति पर था, जबकि कांग्रेस के राज्य में दरअसल ये नंबर वन से खिसककर नीचे आ गया है.

आईएलएलडी के सुरिंदर दहिया कहते हैं, “दरअसल कांग्रेस सरकार झूठ बोलने में नंबर वन है. हम 1800 करोड़ का रेवेन्यू छोड़कर गए थे, लेकिन अब सरकार पर 11000 करोड से ज़्यादा का कर्ज़ है. इन्होंने कहा कि वो वैट समाप्त कर देंगे, लेकिन वो नहीं हुआ.”

विकास हुआ या नहीं

शिकायतें ये भी है दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले मुख्यमंत्री के क्षेत्र में ज़्यादा धन खर्च हुआ है , लेकिन प्रेक्षक कहते हैं कि हरियाणा में ये हमेशा से होता रहा है.

युवा इस नंबर वन के दावों के बारे में क्या सोचते हैं, यही जानने हम पहुँचे रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय.

छात्रों की कई शिकायतें हैं, उनका कहना है कि पढाई में हरियाणा अभी पीछे है, नौकरियाँ रसूक वालों को मिलती हैं, गाँव अभी भी पिछड़े हुए हैं, वहाँ शिक्षा के माध्यमों का विकास नहीं हुआ है.

बीटेक के एक छात्र का कहना था, “हमें नौकरियाँ मिलने की उम्मीद मात्र दस प्रतिशत ही है. हम जब पढ़ाई पूरी कर यहाँ से निकलेंगे तो हमे काफ़ी मशक्कत करनी पड़ेगी. यहाँ एमटेक पास कर चुके छात्रों से भी कहा जाता है कि नौकरियों की कमी है.”

एक और छात्र का कहना था, "बायोटेक के छात्र को यहाँ कहा जाता है कि यहाँ इसका भविष्य नहीं है, यहाँ बायोटेक कंपनियों की कमी है, इसके वाबजूद छात्र बायोटेक के कोर्स कर रहे हैं. हुड्डा अभी वायदा कर रहे हैं कि वो नई नौकरियाँ पैदा करेंगे लेकिन वायदों का ध्यान नहीं रखा जाता."

नंबर वन के दावों का आधार क्या है, यही समझने के लिए हमने बात की वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेशक पवन कुमार बंसल से. वो कहते हैं कि हरियाणा सरकार ने बिजली के प्लांट लगाए हैं, लेकिन चूँकि बिजली के प्लांट लगाना महंगा प्रोजेक्ट होता है और इसमें लंबा समय लगता है, इसके नतीजे दिखने में करीब एक साल और लगेगा.

वो कहते हैं, ‘सरकार ने कुछ लोकलुभावने काम किए हैं, जैसे किसानों को बैंकों से मिलने वाले कर्ज़ का ब्याज दर घटा कर चार प्रतिशत कर दिया जिससे किसानों को लाभ हुआ, लेकिन ये बात सही है कि सड़कों की हालत अभी भी बेहद खराब है. इसका कारण भ्रष्टाचार है. सड़कें बनती हैं और टूट जाती हैं.’

महारऋषी दयानंद विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के प्रमुख प्रोफ़ेसर जीके कर भी कहते हैं कि ये बात गलत नहीं है कि हरियाणा दूसरे प्रदेशों से आगे है. वे कहते हैं, “अगर आप मध्य प्रदेश जाइए या बिहार जाइए, वहाँ आपको ना ही बिजली मिलेगी, ना पानी मिलेगा. उड़ीसा को ही लीजिए, वहाँ तो भुवनेश्वर और राउरकेला को छोड़ दें तो रोड की स्थिति बेहद खराब है. पचास साल पहले जो स्थिति थी, अब भी वही है. हरियाणा में स्थिति इन सब जगहों से बहुत बेहतर है.”

संबंधित समाचार