नासिक में कई पार्टियाँ आश्वस्त हैं

नासिक की रैली
Image caption कई जगह भीड़ नेताओं को देखने के लिए जुटती है. हो सकता है सभी मतदाता न हों.

इस महीने की तेरह तारीख़ को महाराष्ट्र में 288 विधान सभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है.चुनावी माहौल देखने मैं नासिक पहुंचा. मैंने शुरुआत की नासिक के राम घाट से जो हिंदू धर्म के तीर्थ स्थानों में से एक है और जहाँ हर बारह साल पर महा कुंभ मेला लगता है. यह वह जगह है जहाँ से नेता चुनाव प्रचार शुरू करते हैं. मंगलवार को महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने भी नासिक में अपने चुनाव प्रचार का आरम्भ यहीं पर एक सभा के साथ किया था. बुधवार को मैं उनकी एक रैली देखने गया जहाँ लोगों की एक बड़ी भीड़ एकत्र थी. वहां अधिकतर लोगों ने स्वीकार किया कि उनकी उत्सुकता राज ठाकरे को सुनने और देखने में ज्यादा थी. दिलीप भगवत उनमें से एक थे. उनका कहना था, "मैं उन्हें सुनने आया हूँ. मेरी तरह ढेर सारे लोग उन्हें देखने और सुनने आए हैं. वोट हम अपने हिसाब से देंगे."

यानी भीड़ का मतलब यह नहीं कि उनकी पार्टी मनसे नासिक शहर की चार सीटों और जिले भर की पन्द्र सीटों पर आने वाले विधान सभा चुनाव में कब्ज़ा कर लेगी. लेकिन अगर भीड़ जुटाना शक्ति का प्रमाण है तो शिव सेना के मध्य नासिक के उम्मीदवार सुनील बागुल को ज़रूर परेशान होना चाहिए. कल उनकी एक सभा में शामिल होने मैं भी गया. लाउडस्पीकर से शिव सेना के गाने जोर से सुनाई दे रहे थे. उनके समर्थक ज्यादा तो नहीं थे लेकिन उनमें उत्साह ज़रूर था.

सुनील बागुल को भीड़ जमा होने का इंतज़ार था. वह इस लिए देर से आए और घर घर जाकर वोट माँगा.

एक दूकानदार सचिन ने कहा सभी पार्टियों का प्रचार एक है और नारे भी अलग नहीं लेकिन वह कहते हैं शिव सेना उन्हें सब से अच्छी पार्टी लगती है. "शिव सेना शहर के विकास के मुद्दे पर लड़ रही है इसलिए मैं शिव सेना को वोट दूंगा." बागुल कहते हैं वह महंगाई और विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन जब मैं ने उनसे पूछा की आपके वोट मनसे काट सकती है तो उन्होंने कहा, "मनसे हमारे वोट ज़रूर काटेगी लेकिन कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के समर्थक महंगाई की मार से तंग आकर हमारे पास आ रहे हैं जिस से हमारा बहुमत साबित हो जाएगा."

नासिक केवल एक तीर्थ स्थान ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे की तरह एक औद्योगिक नगरी भी है. यहाँ की शराब मशहूर है. यहाँ महिंद्रा के वाहन के कारखाने भी हैं और एक बड़ा आईटी पार्क भी है. शहर का विकास तेजी से हो रहा है लेकिन इसकी रफ़्तार यहाँ के लोगों को कम लगती है. जीतेन्द्र अल्वी यहाँ एक कॉलेज में पढ़ते हैं. उनका कहना है कि विकास यहाँ के लेगों के लिए एक बड़ा मुद्दा है क्यूँकि विकास के साथ साथ झोंपड़पट्टियां भी बढ़ रही हैं और गंदे पानी के निकासी का इंतिज़ाम सही नहीं है. मध्य नासिक से बागुल चुनौती दे रहे हैं कांग्रेस की उम्मीदवार शोभा बच्चव को जो महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग में एक राज्य मंत्री भी हैं और 2004 में जब नासिक में एक ही विधान सभा की सीट थी तो वह यहाँ से जीती भी थीं. शोभा बच्चव आत्म विश्वास देखते हुवे कहती हैं उन्हें किसी भी उम्मेदवार से खौफ नहीं क्यूंकि उन्हों ने इस शहर के विकास के लिए बहुत काम किया है. उन्हों ने कहा, "हमारे सामने कोई उम्मीदवार टिक नहीं पाएगा. हम जनता से जुड़े हुए हैं. मेरे ऊपर मंत्री बनने के बाद शहर को नज़र अंदाज़ करने का इल्जाम भी ग़लत है क्यूँकि उसके बाद मैं ने 100 बिस्तरों का एक अस्पताल बनवाया है और कई स्कूल खुलवाए हैं." यहाँ के राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि शोभाजी के आत्मविश्वास का ख़ास कारण उनके चुनाव क्षेत्र में 40 प्रतिशत मुस्लिम वोट का होना और शिव सेना के वोट को मनसे द्वारा काटे जाने के खतरे का होना है. नाशिक शहर में चार सीटें हैं जबकि जिले भर में 15. शिव सेना और कांग्रेस दोनों को उम्मीद है की नासिक जिले की 15 सीटों में बहुमत उन्हें ही मिलेगा.

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