तीन राज्यों में भारी मतदान

  • 13 अक्तूबर 2009
मतदान
Image caption तीनों राज्यों में मतदान की शुरुआत धीमी रही

महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा के लिए सामान्य से लेकर भारी मतदान हुआ है.

चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए 60, हरियाणा में 66 और अरुणाचल प्रदेश में 72 प्रतिशत मतदान हुआ है.

कुछेक स्थानों पर छुटपुट हिंसा की ख़बरें हैं जिनमें एक पोलिंग एजेंट की मौत हो गई है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा के कैथल ज़िले में कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों के बीच हुए संघर्ष में एक पोलिंग एजेंट की मौत हो गई.

दूसरी ओर महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली ज़िले में एक स्थान पर चुनाव अधिकारियों पर गोलीबारी की घटना सामने आई है. हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ.

बीबीसी के पूर्वोत्तर भारत संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार अरुणाचल प्रदेश में शुरुआत में मतदान धीमा था, लेकिन बाद में मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें गईं.

लोकसभा चुनाव के चार माह बाद हो रहे इन विधानसभा चुनावों के नतीजों पर मुख्य राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हुई हैं.

चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं.

तीनों राज्यों में मतगणना 22 अक्तूबर को होगी.

महाराष्ट्र

तीनों राज्यों में सबसे बड़ा महाराष्ट्र है जहां 288 सीटों के लिए सात करोड़ 56 लाख से ज़्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.यहां कांग्रेस- राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन सत्ता में है.

लोकसभा चुनाव में भी इस गठबंधन ने कुल मिलाकर बढ़िया प्रदर्शन किया था लेकिन शिव सेना-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने महँगाई और सुरक्षा से जुड़े मुद्दा उठाकर मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश की है.

शिव सेना से नाता तोड़ने के बाद राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (एमएनएस) भी विधानसभा चुनाव में दमखम के साथ उतरी है.

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल और उनके मंत्रिमंडल के 37 सदस्यों सहित साढ़े तीन हज़ार से ज़्यादा उम्मीदवार चुनावों में अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.

इनमें 1820 निर्दलीय और 211 महिला उम्मीदवार शामिल हैं.

हरियाणा

हरियाणा में एक करोड़ बीस लाख से ज्यादा मतदाता विधानसभा के 90 सदस्यों के निर्वाचन के लिए मत डालेंगे.

Image caption तीनों राज्यों के ये चुनाव राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं

यहां कांग्रेस की सरकार है और मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा विकास के आधार पर दोबारा चुने जाने का दावा कर रहे हैं.

हरियाणा में विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ है.

भाजपा और इंडियन नेशनल लोक दल का गठबंधन टूट चुका है. भाजपा अकेले चुनाव लड़ रही है.

साथ ही भजनलाल अपनी पार्टी के साथ चुनाव मैदान में हैं.

अरुणाचल

अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की 60 सीटें हैं लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू समेत तीन सदस्य पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं.

बाकी 57 सीटों के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से 154 उम्मीदवार मैदान में हैं.

इनमें से कम से कम 50 ऐसे हैं जिन्होंने इस बार अपनी निष्ठाएं बदल ली हैं. यानी पिछली बार तो उन्होंने किसी और पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

लेकिन अबकी किसी और के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

पिछला विधानसभा चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़ने वाले कम से कम 20 उम्मीदवारों ने अबकी विभिन्न राजनीतिक दलों का दामन थाम लिया है.

राज्य में सत्तारुढ़ कांग्रेस को केंद्र की यूपीए सरकार में अपनी सहयोगी दो पार्टियों-तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से ही टक्कर मिल रही है.

इन दोनों ने ज्यादातर टिकट पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर जीते लोगों को दिए हैं.

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