मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी में खुशियाँ लौटीं

  • 14 अक्तूबर 2009
मदर टेरेसा हाउस
Image caption अल्बानिया सरकार के मदर टेरेसा की अस्थियाँ माँगने का भारत में विरोध हुआ था

मदर टेरेसा की अस्थियां अल्बानिया सरकार को न सौंपने के केंद्र सरकार के फ़ैसले से अनिश्चयता और असमंजस के बीच झूल रहे कोलकाता स्थित मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी मुख्यालय मदर हाउस में खुशियां लौट आई हैं.

अल्बानिया सरकार के अनुरोध मिलने के बाद से ही मदर हाउस में रहने वाले तमाम लोग आशंकाओं के बीच दिन गुजार रहे थे.

महानगर के बुद्धिजीवियों ने अल्बानिया सरकार की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि सरकार को इससे इनकार कर देना चाहिए.

अब मंगलवार को केंद्र सरकार के फ़ैसले के बाद मदर हाउस में खुशी की लहर दौड़ गई है.

मदर हाउस की प्रवक्ता सिस्टर क्रिस्टी समेत वहां रहने वाली अनेक नन ने केंद्र सरकार के इस फ़ैसले पर खुशी जताई है.

सिस्टर क्रिस्टी ने कहा है कि मदर का पूरा जीवन ही यहां गरीबों और समाज के पिछड़े तबके के लोगों की सेवा में बीता था.

उनकी सौवीं जयंती पर उनकी अस्थियों को बाहर भेजने का फ़ैसला किसी सदमे से कम नहीं होता.

ध्यान रहे कि मदर की समाधि इसी मदर हाउस में है. वहां नियमित तौर पर प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं.

मदर टेरेसा की समाधि

अनेक विदेशी राजनयिक और राष्ट्राध्यक्ष कोलकाता दौरे के दौरान मदर हाउस जाकर मदर की समाधि पर श्रद्धांजलि जरूर अर्पित करते हैं.

जानी-मानी लेखिका महाश्वेता कहती हैं, ''मदर टेरेसा का जन्म भले अल्बानिया में हुआ था. लेकिन कोलकाता में उनके काम ने ही उनको मदर टेरेसा बनाया. वे तो महानगर की विरासत और इतिहास का हिस्सा हैं. कोई अपनी विरासत दूसरों को नहीं सौंपता.''

जाने-माने फिल्मकार मृणाल सेन ने कहा है, ''मदर की सौवीं जयंती के मौके पर अल्बानिया सरकार की भावनाओं को समझा जा सकता है. लेकिन कोलकाता मदर की गतिविधियों का केंद्र रहा. इसलिए उनकी अस्थियां कहीं और भेजने की कोई तुक नहीं है.''

पश्चिम बंगाल में ईसाइयों के प्रमुख संगठन बंगीय क्रिस्टीय परिसेवा (बीसीपी) के महासचिव हेरॉड मल्लिक कहते हैं, ''मदर ने भारतीय नागरिकता ली थी. वे अपनी मर्जी से भारतीय नागरिक बनी थीं. इसलिए अल्बानिया सरकार की मांग का समर्थन नहीं किया जा सकता.''

वर्ष 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली मदर टेरेसा 1929 में कोलकाता आई थी.

उन्होंने यहां जिस मिशनरीज आफ चैरिटी की स्थापना की वह दुनिया भर के 133 देशों में सक्रिय है.

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