सबसे लंबा फ़्लाईओवर खुला

फ्लाईओवर
Image caption फ्लाईओवर के नामकरण को लेकर विवाद हुआ

भारत का सबसे लंबा फ़्लाईओवर हैदराबाद नगर में सोमवार को ट्रैफ़िक के लिए खोल दिया गया.

हैदराबाद के मुख्यमंत्री के रोसैया ने 11.66 किलोमीटर लंबे और 17 मीटर चौड़े इस फ़्लाईओवर का उदघाटन किया.

इसे देखने हज़ारों की भीड़ जुटी थी लेकिन यह समारोह विवादों से मुक्त नहीं था.

एक तरफ़ मुस्लिम समुदाय इस फ़्लाईओवर का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्रा पीवी नरसिंहा राव के नाम पर करने पर नाख़ुश है तो दूसरी ओर ऑटो रिक्शा संघ इस बात को लेकर नाराज है कि इस पर केवल चार पहियों वाले वाहनों को ही इसके इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है.

हैदराबाद के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक संगठन और कांग्रेस की मित्र मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन ने उदघाटन समारोह का बहिष्कार किया.

इस संगठन की माँग थी कि फ़्लाईओवर को नरसिंहा राव के नाम से नहीं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी के नाम से जाना जाए क्योंकि उन्होंने ही इस परियोजना की नींव रखी थी. हालांकि सरकार ने यह मांग नहीं मानी.

इस फ़्लाईओवर के खुलने से हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जाने वाले यात्री विशेष रूप से ख़ुश थे. यह फ़्लाईओवर मेहदीपट्टनम से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर सात तक फैला हुआ है और चार लेन वाली इस एक्सप्रेस पर गाड़ियाँ 60 किलोमीटर की गति से जा सकती है.

अक्सर हवाई यात्रा करनेवाले एक व्यापारी मोहन रेड्डी ने बताया, "पहले इस रास्ते पर इतना ट्रैफ़िक जाम रहता था कि मुझे फ़्लाइट छूट जाने का डर लगा रहता था. लेकिन अब मैं इत्मीनान से जा सकता हूँ."

नई तकनीक

हैदराबाद मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के आयुक्त जवाहर रेड्डी का कहना था कि 11.6 किलोमीटर लंबे फ़्लाईओवर की यात्रा केवल 10 मिनट में पूरी हो सकती है जो पहले असंभव था. अथॉरिटी के चीफ़ इंजीनियर विवेक देशमुख ने कहा कि यह न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का सबसे लंबा फ़्लाईओवर है.

वे कहते हैं, "इस फ़्लाईओवर की सबसे बड़ी विशेषता वो टेक्नालॉजी है जिसका हमने देश में सबसे पहले उपयोग किया है. इसके तहत हमने प्री कास्ट सेग्मेंट्स कहीं और तैयार किए और उन्हें लांचर से उनके निर्मित जगह तक पहुँचाया. तब जाकर इसके निर्माण में तीन वर्ष का समय लगा. यदि हम पुराना तरीका इस्तेमाल करते तो यह काम पाँच वर्ष में भी पूरा नहीं होता. हमारे बाद अब दूसरे नगरों में भी इस तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है."

यह पूरा फ़्लाईओवर 328 खंभों पर टिका है उनपर 3500 टुकड़ों को जोड़ा गया है.

इस समय फ़्लाईओवर का उपयोग करने वाले बीच में इससे नहीं उतर सकते और उन्हें पूरे फ़्लाईओवर की यात्रा करनी पड़ेगी क्योंकि फ़्लाईओवर से उतरने और उस पर चढ़ने के लिए जो तीन रास्ते होंगे वे अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं.

मुख्यमंत्री के रोसैया के शब्दों में यह फ़्लाईओवर हैदराबाद की शान उसी तरह बढ़ाएगा जैसे कि उसका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बढ़ा रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि हैदराबाद की ट्रैफ़िक की समस्या उस समय और भी सुलझ जाएगी जब नगर के चारों तरफ़ बनने वाली आउटर रिंग रोड पूरी तरह बन कर तैयार हो जाएगी और नगर के किसी भी भाग में एयरपोर्ट से पहुंचने में केवल 50 मिनट लगेंगे.

यह आउटर रिंग रोड जिस पर कुल छह हज़ार करोड़ का खर्च आएगा लगभग एक चौथाई बन चुकी है.

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