कांग्रेस ने जीते तीनों राज्य

भारत के तीन राज्यों - महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के रुझानों और नतीजों से स्पष्ट है कि कांग्रेस या उसका गठबंधन तीनों ही राज्यों में बहुमत की ओर बढ़ रहे हैं. महाराष्ट्र में कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठबंधन आगे चल रहा है जबकि हरियाणा और अरुणाचल में भी कांग्रेस ही आगे है.

इन तीनों राज्यों में औसतन 66 फ़सीदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.

अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र की 288 सीटों में कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस के गठबंधन को 143 सीटें ( जीत-रुझान मिलाकर) मिल रही हैं. इनमें से कांग्रेस को 80 ( जीत-रुझान मिलाकर) और एनसीपी को 63 ( जीत-रुझान मिलाकर) सीटें मिली हैं.

उधर शिवसेना-भाजपा गठबंधन को 92 सीटें ( जीत रुझान मिलाकर) मिल रही हैं. बीजेपी को 47 और शिवसेना को 45 सीटें ( जीत-रुझान मिलाकर) मिली हैं. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उम्मीदवार 16 सीटों पर आगे चल रहे हैं.

हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल ने संभावना से बेहतर प्रदर्शन किया है और मतगणना के रूझानों-नतीजों के अनुसार उसे कुल 90 में से 29 सीटें मिली हैं और वो दो पर आगे है जबकि कांग्रेस ने 39 सीटें जीती हैं और एक पर आगे है.

अरुणाचल प्रदेश में 60 सीटों में से कांग्रेस 32 जीत चुकी है और सात पर आगे चल रही है. तृणमूल कांग्रेस ने पांच सीटें जीती हैं जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पांच सीटें जीती हैं और एक पर आगे है.

इन चुनावों का महत्व केवल इतना नहीं है कि तीन राज्यों में सरकारे बननी हैं बल्कि लगभग पाँच महीने पहले हुए लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्तापक्ष और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के बीच अपनी लोकप्रियता आज़माने का ये पहला मौका है.

'एमएनएस का असर'

इन तीनों राज्यों में सबसे बड़ा राज्य महाराष्ट्र का है जहां विधानसभा की 288 सीटें हैं. महाराष्ट्र में 60 फ़ीसदी मतदान हुआ था.

महाराष्ट्र में कांग्रेस- राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन सत्ता में है. लोकसभा चुनाव में भी इस गठबंधन ने कुल मिलाकर बढ़िया प्रदर्शन किया था और वैसा ही प्रदर्शन विधानसभा रूझानों में भी नज़र आ रहा है.

शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने महँगाई और सुरक्षा से जुड़े मुद्दा उठाकर मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश की थी.

मुंबई से बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद कहते हैं, "कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अटकलें लगा रहे हैं कि किसे कौन सा मंत्रालय मिलेगा."

ज़ुबैर अहमद के अनुसार, "महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का प्रदर्शन लोकसभा चुनाव के दौरान अनेक जगहों पर अच्छा रहा था और टीकाकार मानते हैं कि यदि उसे 15-20 सीटें मिलती हैं तो शिवसेना-भाजपा गठबंधन मुश्किल का सामना कर सकता है क्योंकि ये उसका नुकसान होगा."

आईएनएलडी की लोकप्रियता बढ़ी

हरियाणा विधानसभा में 90 सीटें हैं और सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को पिछले चुनाव में 66 सीटें मिली थीं जबकि आईएनएलडी को मात्र नौ सीटें मिल पाई थीं.

लोकसभा में दस में से नौ सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस को इंडियन नेशनल लोकदल से टक्कर मिल रही है. भाजपा आईएनएलडी से अलग होकर अपने बूते पर चुनाव लड़ी है.

वहाँ तीन राजनीतिक परिवारों - मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल और एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की प्रतिष्ठा दांव है.

कांग्रेस की अंदरूनी समस्या

अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की 60 सीटें हैं जहां सबसे ज़्यादा लगभग 72 फ़ीसदी मतदान हुआ था. पिछली बार कांग्रेस को वहाँ 32 सीटें मिली थीं और भाजपा को सात. बाक़ी सीटें अन्य और आज़ाद उम्मीदवारों को मिली थीं.

मुख्यमंत्री दोरजी खांडू समेत तीन सदस्य पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं. बाकी 57 सीटों के लिए नतीजे को इंतज़ार है.

कोलकाता से बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है, "अरुणाचल में कांग्रेस की बड़ी समस्य अंदरूनी गतिरोध है.इस बार अनेक कांग्रेस विधायकों को टिकट नहीं मिला और वो बाग़ी हो गए थे. इसलिए कांग्रेस को अरुणाचल के मुद्दे पर भारत-चीन विवाद से फ़ायदा तो हो सकता है लेकिन उसे अपना घर संभालने की समस्या है."

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