प्रतिव्यक्ति उत्सर्जन ही हो आधारः मनमोहन

मनमोहन सिंह
Image caption सम्मेलन में मालदीव के प्रधानमंत्री मोहम्मद नशीद के साथ मनमोहन सिंह

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि जलवायु परिवर्तन पर तय होनेवाली किसी भी दीर्घकालीन नीति का आधार प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन होना चाहिए और भारत तथा दूसरे विका पर्यावरण को बचाने की मुहिम में विकासशील देश विकास के मुद्दे पर कोई समझौता ना कर सकते हैं और ना करेंगे.

दिल्ली में जलवायु परिवर्तन और तकनीक पर हो रही दो दिवसीय उच्चस्तरीय सम्मेलन के पहले दिन उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन पर होनेवाली वार्ताओं में भारत के पक्ष में कोई परिवर्तन नहीं आया है.

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए किसी भी नीति का एकमात्र निष्पक्ष और न्यायपूर्ण आधार प्रति व्यक्ति उत्सर्जन होना चाहिए और भारत इसके लिए अपने दायित्व को समझता है.

जलवायु परिवर्तन के बारे में भारतीय प्रधानमंत्री का ये बयान दिसंबर में कोपेनहेगन में होनेवाले सम्मेलन के हिसाब से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

कोपेनहेगन में होनेवाले सम्मेलन में ये तय किया जाना है कि क्योटो संधि की समयावधि समाप्त होने के बाद ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या से निबटने के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए.

सम्मेलन से पहले इन दिनों जलवायु परिवर्तन को लेकर पूरी दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की सीमा तय करने को लेकर बहस चल रही है और ग्रीन हाउस गैसों में कटौती की एक बाध्यकारी सीमा तय किए जाने को लेकर विकसित और विकासशील देशों में गहरे मतभेद हैं.

कार्बन उत्सर्जन

मनमोहन सिंह ने सम्मेलन में कहा कि जलवायु परिवर्तन से निबटने की कोई दीर्घकालीन व्यवस्था बनाने के लिए विभिन्न देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन का आधार ही एकमात्र निष्पक्ष और न्यायपूर्ण आधार हो सकता है.

उन्होंने साथ ही कहा कि कि भारत ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को लेकर अपने दायित्व को समझता है.

उन्होंने कहा,"भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन विश्व के औसत कार्बन उत्सर्जन के एक चौथाई से भी कम है और हम दुनिया में सबसे कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करनेवाले देशों में आते हैं."

साथ ही उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ ऊर्जा का इस्तेमाल भी बढ़ेगा बशर्ते उत्सर्जन को कम करनेवाली नई तकनीकों की सहायता नहीं ली जाए.

मनमोहन सिंह ने कहा,"हम अपने इस संकल्प पर अटल हैं कि हमारे यहाँ होनेवाला प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन किसी भी सूरत में विकसित देशों के यहाँ होनेवाले प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन से अधिक नहीं होगा."

तकनीक

मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा कि जलवायु और पर्यावरण के लिए अनुकूल तकनीक के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित राष्ट्रों को धरती के तापमान को बढ़ानेवाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए गंभीरता से प्रयास करने चाहिए.

उन्होंने कहा,"मुझे पूरा विश्वास है कि यदि विकसित देश गंभीरता से प्रयास करते हैं तो वे इसके लिए होनेवाले शोध पर अधिक संसाधन लगाएँगे और इससे ऐसी तकनीकें विकसित हो सकेंगी जो दूसरे देशों के लिए भी उपयोगी रहेंगी."

उन्होंने कहा कि इस दिशा में एक बड़ी बाधा इसलिए आती है कि क्योंकि बड़ी संख्या में विकासशील देश ऐसी तकनीकों को स्वीकार नहीं करते.

लेकिन उनका कहना था कि जबरन किसी पैमाने को लागू करवाकर स्थिति नहीं बदली जा सकती और जो भी नई तकनीकें हैं उन्हें जहाँ संभव है वहाँ प्रयोग कर उनको बेहतर बनाने के लिए कोशिशें जारी रखी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारत ने इस दिशा में जलवायु खोज केंद्रों का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव किया है जिससे कि विकासशील देशों में नई तकनीक और नई खोजों को प्रभावी बनाया जा सके.

उन्होंने कहा,"ये केंद्र स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण तकनीकों की पहचान कर सकते हैं और फिर उनके त्वरित विकास में सहयोग कर सकते हैं."

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है