रिहा पुलिस इंस्पेक्टर की आलोचना

अतिंद्रनाथ  दत्ता
Image caption पिछले गुरुवार को दत्ता को माओवादियों की चुंगल से रिहा कराया गया था

पश्चिम बंगाल में पुलिस का कहना है कि माओवादियों की चुंगल से रिहा कराए गए पुलिस इंस्पेक्टर अतिंद्रनाथ ने पुलिस सेवा आचार संहिता का उल्लंघन किया है.

अतिंद्रनाथ दत्ता जब से रिहा हुए हैं, वो लगातार टेलीविज़न पर आ रहे हैं और पुलिस का कहना है कि वो संवेदनशील जानकारियों को भी लोगों के बीच बाँट रहे हैं.

दत्ता मिदनापुर के सखरैल थाना के इंचार्ज थे जहाँ पिछले मंगलवार को माओवादियों ने हमला करके उन्हें अग़वा कर लिया था. इस हमले में दो पुलिस जवान मारे गए थे.

अग़वा किए जाने के दो रोज़ बाद दत्ता को रिहा करा लिया गया था. उनकी रिहाई के बदले सरकार को जेल में बंद 14 अदिवासी महिलाओं को ज़मानत पर छोड़ना पड़ा था.

विवाद

रिहाई के बाद अतिंद्रनाथ का मीडिया को लगातार इंटरव्यू देने पर पश्चिम बंगाल के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस कुलदीप सिंह का कहना है, "दिन-रात टेलीविज़न पर बोल रहे दत्ता सीधे तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं."

कुलदीप सिंह ने कहा, "इससे पहले की सरकार इस मामले की तफ़्तीश करवाती, उन्होंने मामले की जानकारी बाहर कर दी है."

हालाँकि अतिंद्रनाथ दत्ता पुलिस के इन दावों को ख़ारिज करते हैं.

उनका कहना है, "मीडिया ने मेरी रिहाई में अहम भूमिका निभाई है, ऐसे में जब वो मुझसे पूछते हैं कि अपहरण के दौरान क्या हुआ तो मैं कैसे उसे नज़रअंदाज़ कर सकता हूँ."

लेकिन कुलदीप सिंह का कहना है कि अगर दत्ता अपने कर्तव्यों की लापरवाही में पाए गए तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी.

उधर राज्य के मुख्य सचिव अशोक मोहनती चक्रवर्ती भी दत्ता से नाराज़ है. उनका कहना है, "दत्ता ने ड्यूटी पर आने के लिए कुछ समय माँगा है, लेकिन वो पूरी तरह से ठीक हैं. वो हर समय टीवी पर इंटरव्यू देते रहते हैं और दिनभर में छह बार कपड़े बदलते हैं तो फिर ड्यूटी पर क्यों नहीं आ सकते?"

अतिंद्रनाथ के बारे में कहा जाता है कि जिस निरंतरता से टीवी स्क्रीन पर आ रहे हैं वे पुलिस इंस्पेक्टर के बजाए छोटे पर्दे के एक बंगाली स्टार लगते हैं.

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