विकासशील देशों में भी हो जी-20 सम्मेलन

भारत, चीन और रुस के के विदेश मंत्री
Image caption त्रिपक्षीय बैठक में आपसी सहयोग बढ़ाने और रिश्ते मज़बूत करने की बात कई गई है.

भारत, चीन और रूस के विदेशमंत्रियों ने इस बात की वकालत की है कि भविष्य में जी-20 देशों के शिखर सम्मेलनों का आयोजन विकसित, विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों में बारी-बारी होना चाहिए.

भारत के शहर बंगलौर में मंगलवार को तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की एक त्रिपक्षीय बैठक हुई.

बैठक में तीनों विदेश मंत्रियों ने कहा कि जी-20 के आयोजन को उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों और विकासशील देशों में ले जाना इसलिए ज़रूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस शिखर सम्मेलन के संदर्भ में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके.

बैठक में विदेश मंत्रियों का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसाशनिक ढाँचे में विकसित और विकासशील देशों को बराबारी का हक़ मिलना चाहिए. साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों का हिस्सा पाँच प्रतिशत तक होना चाहिए.

साथ ही यह भी सहमति बनी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की वित्तीय संस्थाओं में विकसित देशों और विकासशील देशों को मताधिकार दिए जाने में भी निष्पक्षता बरतने की ज़रूरत है.

तीनों विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान यह भी आमराय बनी कि चरमपंथी हमले करनेवालों को क़ानून के दायरे में लाना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के मामले में ऐसे प्रतिबंधों का पालन तय करवाना भी अहम ज़िम्मेदारी है.

इस त्रिपक्षीय बैठक के बाद एक साझा घोषणापत्र भी जारी किया गया जिसमें रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्री इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं. आपसी सहयोग बढ़ाने और रिश्ते मज़बूत करने की बात भी कही गई है.

बैठक में इस बात पर भी सहमति हुई है कि कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए नवंबर-दिसंबर,2009 में विशेष समिति की बैठक दिल्ली में होगी.

तीनों विदेश मंत्रियों ने अक्तूबर 2008 में काबुल के भारतीय उच्चायुक्त पर हुए आतंकवादी हमले की निंदा की.

आतंकवाद की निंदा

बैठक में हर प्रकार के आतंकवाद की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आग्रह किया गया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक नीति को तुरंत अपनाया जाए.

ईरान के परमाणु मुद्दे पर मंत्रियों का कहना था कि इसे शांतिपूर्ण ढ़ंग से सुलझाने के लिए पुरे प्रयास किए जाने चाहिए.

बैठक में तीनों देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा है कि भारत, चीन और रूस दुनिया के 20 प्रतिशत भूमि पर रहते हैं जबकि दुनिया की 39 प्रतिशत जनसंख्या यहाँ आबाद है.

इस त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के विदेशमंत्री यांग जेईची और रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव अपने वरिष्ठ अधिकारियों के दलों के साथ बंगलौर पहुंचे थे.

हालांकि इससे पहले इन तीन देशों के विदेश मंत्रियों की ऐसी नौ बैठकें हो चुकी है.

लेकिन बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जब विश्व पर आर्थिक संकट का ग्रहण लग गया है और आतंकवाद की समस्या जटिल होती जा रही है, यह बैठक ज़्यादा अहम हो गई है.

भारत-चीन बैठक

त्रिपक्षीय बैठक के बाद भारत और चीन के विदेश मंत्री अलग से भी मुलाक़ात करेंगे. ये दोतरफा मुलाक़ात इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के दिनों में भारत और चीन के संबंधों में कड़वाहट बढ़ी है.

चीन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर आपत्ति जताकर यह संकेत देने की कोशिश कि वो इस भारतीय प्रदेश पर अब भी अपना दावा रखता है. इसके अलावा चीन ने तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश के प्रस्तावित दौरे पर भी आपत्ति जताई है.

हालांकि भारत ने इन दोनों ही आपत्तियों को रद्द कर दिया है और अरुणाचल प्रदेश को अपना अटूट अंग बताया है और साथ ही दलाई लामा को भी अरुणाचल प्रदेश जाने की अनुमति दे दी है लेकिन इस दोतरफा भेंट पर इन सभी विवादों का साया पड़ता दिखाई दे रहा है. भारत के विदेशमंत्री एसएम कृष्णा इस बैठक को लेकर काफी आशान्वित हैं. उन्होंने कहा है कि भारत और चीन के संबंध दिनोंदिन बेहतर हो रहे है और आपसी सहयोग बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों ही महत्वपूर्ण देश हैं इसलिए उन्हें बहुत ही फूँक-फूँककर क़दम रखने की ज़रुरत है. लेकिन बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जब विश्व पर आर्थिक संकट काग्रहण लग गया है और आतंकवाद की समस्या जटिल होती जा रही है, यह बैठक ज़्यादा अहम हो गई है.

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