घरेलू हिंसा की शिकार कामकाजी महिलाएँ

Image caption महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं

घरेलू हिंसा का दंश क्या घर से बाहर निकलने वाली महिलाओं पर कम हुआ है,अगर आप सोच रहे है हाँ तो आप सही नहीं हैं.

21वीं शताब्दी में महिलाओं का घर की दहलीज लांघकर नौकरी पर जाना महिला सशक्तिकरण से ज़रुर जोड़ कर देखा जाता होगा लेकिन कामकाजी महिलाओं पर घरेलू हिंसा को लेकर किए गए शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है.

शोध के मुताबिक शादीशुदा महिलाएं जो काम पर जाती हैं उन्हें घरेलू हिंसा का ज्यादा ख़तरा झेलना पड़ता है.

इस शोध के लिए बंगलुरु की 750 कामकाजी महिलाओं को चुना गया. इनकी उम्र 16-25 साल की थी. इन महिलाओं से दो साल में तीन बार साक्षात्कार किया गया.

साक्षात्कार में पाया गया कि जो महिलाएँ नौकरी नहीं करती थीं उन्हें नौकरी करने के बाद घरेलू हिंसा का ज्यादा दर्द झेलना पड़ा.

ये शोध आरटीआई इंटरनेशनल विमन गलोबल हेल्थ इम्पेरेटिव,भारतीय प्रबंधन सरकार संस्थान,बंगलुरू और महिलाओं के मामले पर शोध करने वाली संस्था इंटरनेशनस सेंटर फॉर रिसर्च ऑन विमन ने किया है.

शोध में ये तथ्य भी निकलकर आया कि जिन महिलाओं के पति को नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही थी या नौकरी में मुश्किल आ रही थी उन्हें दोगुना घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा.

ये अध्ययन भारत में घरेलू हिंसा के बढ़ते स्तर को दर्शाता है.

इस अध्ययन में शामिल 57 फ़ीसदी महिलाएँ इस शोध में शामिल होने से पहले ही घरेलू हिंसा का शिकार हो चुकी थी.

जबकि 19 फ़ीसदी महिलाओं ने इस अध्ययन से पहले घरेलू हिंसा का सामना नहीं किया था.

वहीं एक चौंकाने वाला तथ्य ये था कि जिन महिलाओ ने प्रेम विवाह किया था उन्हें घरेलू हिंसा की दोगुनी मार झेलनी पड़ी.

अध्ययन के अनुसार ये सामाजिक व्यवस्था के विरुद्व चलने वाली महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का सूचक है.

इस विषय पर शोध कर चुकी सुनीता कृष्ण कहती हैं कि महिला सशक्तिकरण से जुड़ी चुनौती जटिल है.

उनका कहना था,'' जहाँ महिलाओं के लिए रोज़गार बढ़े है वही इससे जुड़े सामाजिक असर पर ध्यान देना भी ज़रुरी है. हमने जो अध्ययन किया है वो इस बात का सबूत है कि महिलाओं और पुरुषों के काम में तेज़ी से हो रहे बदलाव नें मुश्किलें खड़ी कर दी हैं जिसमें महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा भी शामिल है.''

महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा को रोकने लिए 2006 में कानून लागू किया गया था. इसमें मार पिटाई के साथ साथ जबरदस्ती यौन शोषण, भावनात्मक स्तर पर यातना और अपमान शामिल है.

इस मामले में पति पर 20 हज़ार रुपए का जुर्माना और तीन महीने की सज़ा हो सकती है.