'अब भी आग की लपटें आसमान को छू रही हैं'

आग
Image caption इलाक़ा धुएँ के गुबार में लिपटा हुआ है और अनिश्चितता का माहौल हर तरफ़ है.

मैं देर शाम जयपुर में खासा कोठी के एक सरकारी अतिथि गृह में था. वहाँ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह संवाददाताओं से रू-ब-रू होने वाले थे.

मेरे मोबाइल फ़ोन की घंटी बजी, एक साथी ने सूचना दी कि जयपुर के बाहरी इलाक़े सीतापुरा क्षेत्र में आग लग गई है.

मैंने सोचा की मामूली घटना होगी. लेकिन जैसे ही ख़बर की खोज की, पास ही खड़े पुलिस अधीक्षक जोश मोहन पर नज़र पड़ी, जो अपने मोबाइल से जूझ रहे थे. जब उन्हें मोहलत मिली तो उन्होंने बताया कि आग लगी है.

पुलिस अधीक्षक का कहना था कि मोबाइल नेटवर्क जाम है और वे वायरसलेस पर घटना की जानकारी ले रहे हैं.

चंद लम्हों के बाद उन्होंने बताया, "घटना गंभीर है. जानमाल का नुक़सान हो सकता है. तेरह एंबुलेंस और अग्निशमन की अनेक गाड़ियाँ घटना स्थल की ओर रवाना कर दी गई हैं."

बस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक पत्रकार का फ़र्ज़ निभाने मैं मौक़े के लिए रवाना हो गया. मेरे साथ दूसरे पत्रकार भी निकल पड़े.

मुशकिल होता सफ़र

ज्यों-ज्यों घटना स्थल की ओर बढ़ा, सफ़र मुशकिल होता चला गया. शादियों के जश्न और बारातियों के हुजूम से सड़कें जाम थीं, लेकिन इसी बीच एक-एक कर सायरन बजाती अग्निशमन की गाड़ियाँ घटना स्थल की ओर दौड़ रही थीं.

सारी बाधाओं को पार करते हुए घटना स्थल से तीन किलोमीटर दूर ही पहुँचा कि पुलिस ने मेरी गाड़ी रोक दी. पुलिस के साथ आम लोग भी बाधा बन रहे थे. आम लोग उत्तेजित हो चुके थे. आगे जाने वाले वाहनों को तोड़ने की धमकी दे रहे थे.

मैं ख़तरे को समझ गया. पैदल ही घटना स्थल की ओर चल पड़ा. क़रीब पहुँचा तो देखा कि पूरा इलाक़ा अंधेरे में डूबा हुआ है, लोगों का रेला आ जा रहा है. सभी लोग एक ही बात कर रहे हैं और वो थे 'आग की विकरालता के क़िस्से.'

आग की लपटें हमें बराबर दिखाई दे रही थीं. जब घटना स्थल से आधा किलोमीटर दूर ही था तो एक साथी पत्रकार ने कहा कि पाँच धमाके हो चुके हैं. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यहाँ से आगे मत बढ़ो और धमाके हो सकते हैं.

इसी बीच मैंने कुछ प्रत्यक्षदर्शियो से बातचीत की. मुकेश जो प्रभावित इलाक़े के क़रीब ही एक फ़ैक्ट्री के कारीगर हैं. उन्होंने मुझसे कहा कि जैसे ही आग की सूचना मिली हर तरफ़ अफ़रातफ़री मच गई. हर कोई बेचैन होकर इधर-उधर भागने लगा. वे भी सुरक्षित स्थान की ओर भागे. उनका कहना है कि घंटों हो गए हैं लेकिन अब भी उनपर बदहवासी का आलम है.

पाँच धमाके

एक और नौजवान प्रत्यक्षदर्शी किशोर, जो घटनास्थल से आधा किलोमीटर दूर के निवासी हैं, कहने लगे, "आग की सूचना मिलते हुए यहाँ कोहराम मच गया. मेरे एक परिचित प्रभावित इलाक़े के बहुत ही क़रीब रहते हैं. सूचना मिलते ही वे अपने घर की ओर परिजनों का हाल जानने चल पड़े, लेकिन जाम ने उनकी परेशानी बढ़ा रखी थी."

किशोर का कहना है कि स्थिति हर जगह ख़ौफ़नाक है.

वहीं जिलाधीश कुलदीप रांका भी मुझसे मुख़ातिब हुए. उन्होंने कहा, "जानमाल का नुक़सान हुआ है. बचाव कार्य जारी है और मैं घटना की पूरी जानकारी ले रहा हूँ. सबसे पहली और बड़ी प्राथमिकता लोगों की जानमाल की रक्षा करना है जिस पर प्रशासन पूरा ध्यान दे रहा है."

अब भी आग की लपटें आसमान को छू रही हैं, इलाक़ा धुएँ के गुबार में लिपटा हुआ है. अनिश्चितता का माहौल हर तरफ़ है. अनेक चहरे बदहवास हैं. चिंतित भाव को महसूस किया जा सकता है.

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