कर्नाटक भाजपा में संकट बरकरार

येदियुरप्पा
Image caption रेड्डी बंधु मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के ख़िलाफ़ हैं और उन्हें पद से हटाना चाहते हैं.

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी सरकार और उनके विरोधियों के बीच अभी भी गतिरोध बरकरार है.

जहां मुख्यमंत्री के समर्थन नेतृत्व में परिवर्तन नहीं चाहते हैं वहीं विरोधी येदियुरप्पा की बर्खास्तगी पर अड़े हुए हैं.

रविवार को मुख्यमंत्री बी येदियुरप्पा के समर्थकों ने पार्टी आलाकमान से मुलाक़ात की है लेकिन संकट सुलझने के आसार दिख नहीं रहे हैं.

मुख्यमंत्री के समर्थक गृह मंत्री वीएस आचार्य और पूर्व सांसद धनंजय कुमार ने राजधानी दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की.इस मुलाकात के दौरान इन दोनों नेताओं ने पार्टी हाई कमान को राज्य में नेतृत्त्व में बदलाव न करने के लिए मनाने की कोशिश की.

गृह मंत्री आचार्य की अध्यक्षता में, काऩून मंत्री सुरेश कुमार और गणेश कार्निक ने लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ,उपनेता सुष्मा स्वाराज और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात की इन सब का ढृढ़ रुप से एक ही मत था कि कर्नाटक में नेतृत्त्व का कोई बदलाव नहीं होना चाहिए.

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के विपक्षी खेमे के सदस्य और रेड्डी भाईयों के क़रीबी माने जाने वाले विधानसभा के अध्यक्ष जगदीश शेट्टर ने भाजपा नेता अरुण जेटली से मुलाकात की.

जनार्दन रेड्डी और जी करुणाकर रेड्डी का आरोप है कि येदियुरप्पा राज्य में तानाशाह के तौर पर सरकार चला रहे हैं और किसी भी मंत्री की बात नहीं सुनते है.

पिछले कुछ महीनों से रेड्डी भाई सार्वजनिक तौर पर मुख्यमंत्री पर ऐसे आरोप लगाते रहे है वहीं ताज़ा घटनाक्रम में उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत काम को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

हाल ही में दोनों भाईयों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी. साथ ही ये भी दावा किया था उनके पक्ष में भाजपा के 117 विधायकों में से 60 विधायक है.

रेड्डी भाईयों ने जगदीश शेट्टर को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी.वैसे ये पूरा मामला राजनीति से कम धंधे से ज्यादा जोड़ कर देखा जा रहा है क्योंकि रेड्डी भाई खनन व्यापार से जुड़े हुए हैं.

भाजपा मामलों की जानकार और द हिंदू अखबार की वरिष्ठ पत्रकार नीना व्यास कहती हैं,

‘‘सब जानते है कि वो खनन के व्यापारी है और बेल्लारी और आंध्र प्रदेश के जो आस पास के इलाके है उनका जो धंधा है उसमें उन्हें खुली छूट मिले.वो वहां के राजा बने रहें लेकिन ऐसा वो नहीं कर पा रहे है क्योंकि उसमें मुख्यमंत्री दखल दे रहे थे.इस पूरे मामले में येदियुरप्पा की कितनी भूमिका रही है वो कहना मुशिकल है पर भाजपा नेताओं का ये जरुर कहना है कि ये दोनों भाई पैसे वाले है ऐसे में मामले को संभालना मुशिकल है.’’

भीतर घात और नेतृत्व में बगावत झेल रही भाजपा के लिए ये एक और झटका है इससे पहले वसुंधरा राजे को राज्य में विपक्ष की नेता के पद से हटाने का मामला हो या जंसवत सिंह का मामला इन सभी मामलों में पार्टी की ख़ासी किरकिरी हो चुकी है.

संबंधित समाचार