मकान है पर कार नहीं

उच्चतम न्यायालय
Image caption पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन ने ऐसा करने से मना कर दिया था

भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के पास न कोई फ़िक्स्ड डिपोजिट है, न हीं उन्होंने शेयरों में निवेश किया है. उनके पास एक पुरानी सेंट्रो कार है और 20 स्वर्ण मुद्राएँ हैं.

न्यायमूर्ति बालाकृष्णन के पास लगभग 18.08 लाख की संपत्ति है जिसमें केरल और फरीदाबाद में भूखंड शामिल है.

ग़ौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश सहित उच्चतम न्यायालय के 20 अन्य जजों की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया गया है. अब कोई भी उच्चतम न्यायालय की वेब साइट पर जाकर इन जजों की चल-अचल संपत्ति के बारे में जानकारी ले सकता है.

अगले मुख्य न्यायाधीश की कतार में लगे वरिष्ठ न्यायाधीश एसएच कपाड़िया के पास कोई वाहन नहीं है. ब्यौरे के मुताबिक उनके पास मुंबई में एक मकान है जिसकी कीमत 20 लाख रुपए है. इसके अतिरिक्त उनके पास चल-अचल संपत्ति के रुप में क़रीब 41.15 लाख रुपए हैं.

न्यायाधीश कपाड़िया ने शेयरों में निवेश किया है जिनका बाजार मूल्य 22 लाख रुपए है. साथ ही उनके पास एक लाख 80 हज़ार रुपए के म्यूचुअल फंड है, सावधि जमा और भविष्य निधि में उनके नाम 3.85 लाख और 12.50 लाख रुपए जमा हैं. उनकी संपत्ति में विवाह के समय दिए गए आभूषण भी शामिल है जिनकी कीमत एक लाख रुपए बताई गई है.

न्यायाधीश अलतमस कबीर के पास भी अपना कोई वाहन नहीं है. एक मकान कोलकाता के साल्ट लेक के पास है जिसकी कीमत क़रीब 30.75 लाख बताई गई है. शेयर और म्यूच्युअल फंड में उन्होंने कोई निवेश नहीं किया है लेकिन उनके पास जीवन बीमा में क़रीब 3.70 लाख रुपए और भविष्य निधि में 11.52 लाख रुपए जमा हैं.

सूचना के दायरे में

वेबसाइट का कहना है कि 'चल अचल संपत्ति का ब्यौरा स्वेच्छा' से किया गया है. इस घोषणा के अनुसार अधिकतर जजों के पास छोटी कारें हैं और नौ जजों के पास कार ही नहीं है.

उल्लेखनीय है कि सूचना का अधिकार कानून पारित होने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने जजों की संपत्ति का विवरण देने को कहा था.

पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन ने ऐसा करने से मना कर दिया था. लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि विवरण सार्वजनिक करना होगा क्योंकि मुख्य न्यायाधीश का दफ़्तर सूचना क़ानून के दायरे में आता है.

संबंधित समाचार