'उल्फ़ा नेता बीएसएफ़ को सौंपे'

बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक उल्फ़ा के जिन दो नेताओं को बांग्लादेश में गिरफ़्तार किया गया था उन्हें भारत के सीमा सुरक्षा बल को सौंप दिया गया था.

सूत्रों के अनुसार इन लोगों को शुक्रवार को त्रिपुरा में सौंपा गया. आधिकारिक तौर पर बीएसएफ़ के अधिकारी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं ने बीएसएफ़ के सामने आत्मसमर्पण किया है.

वहीं बांग्लादेश का कहना है कि उसने बीएसएफ़ को बताया है कि इन दोनों के ख़िलाफ़ कोई मामला नहीं है केवल ग़ैर कानूनी तरीके से देश में आने का मामला है इसलिए उन्हें वापस कर दिया गया है.

इन नेताओं के नाम हैं - चित्रबन हज़ारिका जिन्हें उल्फ़ा वित्त सचिव और साशा चौधरी, जिन्हें उल्फ़ा विदेश सचिव बताता है.

इससे पहले गुरुवार को उल्फ़ा के बड़े नेता राजू बरुआ ने पत्रकारों को भेजे एक ईमेल में दावा किया था कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उनके संगठन के दो वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लिया गया है.

उल्फ़ा ने बयान में कहा था कि 'दो नवबंर की मध्यरात्रि को सादा कपड़ों मे हथियारबंद लोग, जो शायद बांग्लादेश पुलिस की विशेष शाखा से थे, उस घर में दाख़िल हुए जहां ये उल्फ़ा नेता रह रहे थे.'

जनवरी में जब से आवामी लीग बांग्लादेश में सत्ता में आई है, तब से उल्फ़ा पर ये दबाव है कि या तो वो बाग्लादेश छोड़ दे या फिर क़ानूनी कार्रवाई का सामना करे.

पिछले कुछ समय में कई उल्फ़ा विद्रोही पकड़े गए हैं और उन्हें या तो ये कह कर कि वो ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से बाग्लादेश मे घुसे हैं, भारत के हवाले कर दिया गया या फिर उन्हें हिरासत मे रख कर उनसे उल्फ़ा के ठिकानों के बारे मे पूछताछ की गई.

वर्ष 2004 मे उल्फ़ा के सेना प्रमुख परेश बरुआ के ख़िलाफ़ अभियोग चलाया गया था कि उन्होंने चिट्गांव बंदरगाह के रास्ते भारी मात्रा में हथियार आयात किए.

उल्फ़ा के महासचिव अनुप चेटा हाल ही में अपनी सज़ा काट कर जेल से बाहर आए हैं. उन्हें 1977 मे ग़िरफ्तार किया गया था जब बांग्लादेश मे आवामी लीग की सरकार थी.

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