'तवांग यात्रा राजनीतिक नहीं'

  • 8 नवंबर 2009
तवांग

तिब्बतियों के धार्मिक गुरु दलाई लामा ने चीन के उन दावों को ग़लत बताया है जिनमें कहा गया है कि वो एक अलगाववादी आंदोलन चला रहे हैं.

दलाई लामा ने अपनी यात्रा को ग़ैर-राजनीतिक बताते हुए कहा: "ये चीन के लिए आम बात है कि मैं कहीं भी जाऊं वो मेरे ख़िलाफ़ अभियान तेज़ कर देते हैं.''

चीन उनकी इस यात्रा का विरोध कर रहा है और उसने भारत सरकार से इस यात्रा पर रोक लगाने की माँग भी की थी.

रविवार सुबह जब वो अरूणाचल प्रदेश के तवांग बौद्ध मठ के पास हेलिकॉप्टर से उतरे तो हज़ारों की संख्या में बौद्ध अनुयायियों ने उनका स्वागत किया.

तवांग में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य विश्व भाईचारा बढ़ाना है.

तवांग में 400 साल पुराना तिब्बती बौद्ध मठ है और दलाई लामा यहां से जुड़े रहे हैं. वर्ष 1959 में जब तिब्बत में चीनियों के ख़िलाफ़ विद्रोह विफल हो गया था तब दलाई लामा अपने साथियों के साथ भारत की ओर भागे थे.

उन्होंने पहला क़दम अरुणाचल में रखा और तवांग उनका पहला पड़ाव बना.

रविवार को दलाई लामा की एक झलक पाने के लिए लोग ट्रक पर लद कर और कई मील की पैदल यात्रा करके तवांग पहुँचे ताकि वे अपने धार्मिक गुरु की एक झलक पा सकें.

वह एक सप्ताह तवांग में बिताएंगे.

दलाई लामा की यात्रा को लेकर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक विवाद भी चल रहा है.

वर्ष 1962 से ही पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद चल रहा है. चीन ने दलाई लामा की यात्रा को लेकर अपना विरोध जताया था और भारत से मांग की थी कि वह दलाई लामा की तवांग यात्रा पर रोक लगाए.

चीन दलाई लामा पर यह आरोप लगाता रहा है कि वे तिब्बत की आज़ादी की मांग करते हैं जबकि तिब्बत उसका अभिन्न अंग है.

जबकि भारत इस बात पर ज़ोर देता है कि दलाई लामा उसके अतिथि हैं और देश के किसी भी हिस्से में जा सकते हैं.

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