हिंदी पर शपथ पर ग्रहण

Image caption अख़बारों ने विधानसभा में मारपीट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है

सभी अख़बारों ने महाराष्ट्र विधानसभा में हिंदी में शपथ ग्रहण करने पर मारपीट की घटना से सभी अख़बार भरे हुए हैं और जैसी की उम्मीद थी हिंदी अख़बारों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

नवभारत टाइम्स का शीर्षक है- हिंदी में शपथ पर ग्रहण.

अख़बार लिखता है कि महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार को जो हुआ, वह किसी शपथग्रहण में शायद ही पहले कभी हुआ हो.

अख़बार ने इस पर संपादकीय भी छापा है जिसमें कहा गया है कि इस घटना के सूत्रधार राज ठाकरे को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए.

संपादकीय में कहा गया है कि कांग्रेस के नेता अगर इतने के बावजूद राज को लेकर नर्मी बरतते हैं तो उन्हें दूसरी जगहों पर इसकी प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना चाहिए.

दैनिक जागरण का शीर्षक है- सदन में मनसे की गुंडागर्दी.

समाचारपत्र लिखता है कि हिंदी से हिंदुस्तान, यह बात भारतीय संविधान, सरकार और आम नागरिकों के लिए सच है, पर राज ठाकरे और उनकी पार्टी के लोगों का इसमें कतई यकीन नहीं है.

जागरण का कहना है कि उन्होंने जो किया, वो पहली नज़र में राष्ट्रविरोधी और विघटनकारी लगता है.

हिंदुस्तान का शीर्षक है- मनसे से हिंदी पर उठाया हाथ.

अख़बार ने पहले पेज पर संपादक की टिप्पणी छापी है जिसमें लिखा है कि तमाचा आजमी के गाल पर नहीं बल्कि हर हिंदी भाषी के स्वाभिमान और हिंदुस्तान के संविधान की मूल भावना पर पड़ा है.

अमर उजाला की सुर्खी है- हिंदी पर हमला.

अख़बार लिखता है कि इस घटना की कड़ी निंदा हुई है और कई नेताओं ने राज ठाकरे की गिरफ़्तारी की माँग की है.

अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की हेडिंग है- गुंडा राज.

अख़बार लिखता है कि ये शर्मनाक दिन था. महाराष्ट्र विधानसभा में पहली बार किसी विधायक पर हमला हुआ जिसके कारण चार विधायकों को चार साल के निलंबित किया गया.

टाइम्स आफ़ इंडिया की सुर्खी है- एमएनएस के क़ानून निर्माता का़नून तोड़नेवाले बने.

समाचार लिखता है कि भाषा को लेकिन सियासत नई नहीं है लेकिन इस घटना से पता चलता है कि ये किस हद तक गिर सकती है.

टाइम्स का कहना है कि इस मुद्दे पर कड़े क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.

इंडियन एक्सप्रेस की हेडिंग है- राज के लोग सड़कों की हिंसा को सदन में लाए.

एक्सप्रेस ख़बर छापी है कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बेटे और नवनर्वाचित विधायक राजेंद्र शेखावत का कहना है कि महाराष्ट्र में रहनेवालों को मराठी सीखनी चाहिए.

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