कांग्रेस-बसपा का शानदार प्रदर्शन

राज बब्बर
Image caption राज बब्बर पहले सपा में ही थे.

उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में केंद्र में सत्तारुढ कांग्रेस और उत्तर प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को भारी सफलता मिली है जबकि मुख्य विपक्षी समाजवादी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को करारा झटका लगा है.

लोकसभा की फिरोजाबाद सीट कांग्रेस के राज बब्बर ने जीत ली है जबकि 11 विधानसभा क्षेत्रों में से 9 पर बहुजन समाज पार्टी, एक पर कांग्रेस पर और एक पर निर्दलीय को सफलता मिली है.

इस उपचुनाव की सबसे ख़ास बात यह है कि यादव बहुल फिरोज़ाबाद लोकसभा सीट कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर ने समाजवादी पार्टी से 85,000 वोटों के अंतर से छीन ली है. राज बब्बर कभी समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारक होते थे लेकिन बाद में बागी होकर कांग्रेस में शामिल हो गए.

फिरोज़ाबाद सीट समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के त्यागपत्र से खाली हुई थी और उनकी पत्नी डिंपल यादव पहली बार यहाँ से चुनाव लड़ी थीं. इससे न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि मुलायम सिंह यादव परिवार की भी प्रतिष्ठा दाँव पर थी.

बसपा की सफलता

कांग्रेस ने मुलायम सिंह के गढ़ फिरोज़ाबाद में सेंध ज़रूर लगा ली है पर झांसी और पडरौना कुशीनगर की अपनी दो विधानसभा सीटें नहीं बचा पाई. पडरौना में बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने केंद्रीय राज्य मंत्री आरपीएन सिंह की मां मोहिनी सिंह को भारी मतों से हरा दिया.

Image caption उपचुनाव के नतीजों से मायावती मज़बूत हुई हैं.

कांग्रेस को झांसी में भी झटका लगा जहाँ बसपा के कैलाश साहू ने आखिरी क्षणों में एक निर्दलीय प्रत्याशी ब्रजेंद्र कुमार को मात्र नौ वोटों से हरा दिया जिस पर मतगणना केंद्र पर हंगामे की नौबत आ गई.

कांग्रेस के श्याम किशोर शुक्ल ने लखनऊ शहर पश्चिम सीट भाजपा से छीन ली. लखनऊ में बीजेपी नेता लालजी टंडन टिकट वितरण को लेकर नाराज चल रहे थे. सत्तारूढ बहुजन समाजवादी पार्टी ने इटावा, भर्थना, पुवाँया, हैसरबाज़ार, इसौली, रारी औऱ ललितपुर सीटें भी जीत लीं जबकि वाराणसी के कोलसला में निर्दलीय अजय राय फिर जीत गए.

मुख्यमंत्री मायावती ने उपचुनाव के नतीजों पर खुशी जाहिर करते हुए जनता का धन्यवाद दिया और कहा कि समाजवादी पार्टी वंशवाद की वजह से हारी है.

कई विश्लेषक मानते हैं कि आमतौर पर उपचुनाव में मतदाता क्षेत्र के विकास के लिए सरकारी पार्टी को जिता देतें हैं लेकिन विश्लेषक इस चुनाव को कांग्रेस और बसपा की जीत से ज़्यादा समाजवादी पार्टी की हार को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, "समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले इटावा और भर्थना, और सबसे ज़्यादा समाजवादी पार्टी की यादव बहुल सीटों में से जहाँ फिरोज़ाबाद संसदीय क्षेत्र में चार लाख यादव मतदाता है वहाँ पर डिंपल यादव की पराजय निश्चित रूप से समाजवादी पार्टी के लिए करारा झटका है."

सपा को झटका

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव औऱ अमर सिंह ने जो शुरुआती प्रतिक्रिया दी है उनसे साफ जाहिर है कि पार्टी की चूलें हिल गई हैं और पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को मुखर होने का मौका मिल गया है.

उधर समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, "उपचुनाव के नतीजे समाजवादी पार्टी के लिए कोई बड़ा झटके का विषय नहीं है, लोकतंत्र ज़रूर आहत हुआ है. समाजवादी पार्टी संघर्ष की पार्टी है, आंदोलन में रही है. हम औऱ संघर्ष करेंगे, जनता के बीच में जाएंगे."

हार की समीक्षा के लिए मुलायम सिंह यादव बैठक बुलाने वाले हैं. हाल ही में सपा से निष्काषित आज़म खां ने तो सीधे-सीधे मुलायम सिंह के त्यागपत्र की मांग कर डाली है जबकि कई अन्य नेता अमर सिंह के बढ़ते वर्चस्व को समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा खतरा बताते हैं.

चुनाव नतीजों से कांग्रेस बहुत उत्साहित है. कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता जोशी बहुगुणा फिरोज़ाबाद की जीत को कांग्रेस की वापसी के संकेत के तौर पर देख रही हैं. वह कहती है, "यह एक ऐतिहासिक चुनाव सिद्ध होगा. जिस तरह 1977 में कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सब सीटें हार गई थी और फिर आज़मगढ का उपचुनाव हुआ और फिर इंदिरा जी ने उसकी बागडोर लेकर और उस चुनाव में मोहसिना किदवई जी को उतारा और पार्लियामेंट पहुँचाया और उसके बाद कांग्रेस की वापसी हुई. उसी तरह से इस चुनाव में भी राहुल गाँधी जी ने पहली बार एक उपचुनाव में आगे बढकर चुनाव में प्रचार किया औऱ सारी कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर खड़े हुई."

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने यह भी कह दिया कि पार्टी अगला विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी. कांग्रेस नेता उम्मीद लगाए हैं कि अब 2012 में पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापस आ जाएगी. हालांकि प्रेक्षकों का कहना है कि इतनी ज्यादा आशावादिता शायद जमीनी हकीकत से दूर है और कांग्रेस को अभी उत्तर प्रदेश में अपनी ज़डें वापस उगाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी.

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