न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर विधेयक

सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति सार्वजनिक करने को लेकर काफ़ी बहस चलती रही

न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों से निबटने के लिए और न्यायपालिका को और जवाबदेह बनाने के लिए केंद्र की यूपीए सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है.

केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि यह विधेयक पूरी न्यायपालिका के लिए होगा लेकिन यह एक तरफ़ा नहीं होगा. अगर यह न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ आरोपों की जाँच में भी काम आएगा तो उन्हें सुरक्षा भी प्रदान करेगा जिससे कि इसका दुरुपयोग न हो.

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए गए एक साक्षात्कार में वीरप्पा मोइली ने कहा कि यह नया क़ानून 1968 के न्यायाधीश जाँच अधिनियम की जगह लेगा.

उन्होंने कहा, "मौजूदा क़ानून सिर्फ़ न्यायाधीशों की अवमानना की प्रक्रिया के विषय में है लेकिन नया क़ानून ज़्यादा व्यापक होगा."

सरकार यह योजना ऐसे समय में बना रही है जब शीर्ष स्तर पर न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ शिकायतें बढ़ रही हैं और महसूस हो रहा है कि मौजूदा क़ानून उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

क़ानून मंत्री ने कहा है कि ब्रिटेन, फ़्रांस और अमरीका सहित पूरी दुनिया के क़ानूनों से सबक़ लेकर इस नए क़ानून का प्रारुप तैयार किया गया है.

वीरप्पा मोइली ने कहा, "इसमें पूरी न्यायपालिका के बारे में क़ानून होगा और इसमें न्यायाधीशों की नियु्क्ति के पहले से लेकर बाद तक सभी मुद्दों पर स्पष्टता होगी."

उन्होंने कहा कि इस विधेयक पर बार काउंसिल और बार एसोसिएशन जैसे न्यायपालिका से सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाएगा.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि विधेयक पेश करने के बाद इसे संसद की स्थाई समिति को भेज दिया जाए.

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