अवैध खनन से करोड़ों का चूना

उड़ीसा के इस्पात और खनन मंत्री रघुनाथ मोहंती ने माना है कि राज्य में लंबे समय से अवैध खनिज उत्पादन चल रहा है, जिससे राज्य सरकार को राजस्व का भारी नुक़सान हो रहा है.

उनके अनुसार राज्य में 1980 से अवैध खनन हो रहा है और इस पर किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया था.

लेकिन उन्होंने राज्य सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि राज्य में खनिजों के अवैध खनन के लिए पूरा दोष राज्य सरकार पर नहीं मढ़ा जा सकता, इसके लिए केंद्र सरकार भी दोषी है.

इस साल जुलाई मे उड़ीसा में ख़निजों के अवैध खनन का मामला प्रकाश में आया था.

इस अवैध खनन से राज्य सरकार को होने वाले नुकसान का अनुमान 110 करोड़ रुपए लगाया गया था.

इसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले की जांच राज्य के सतर्कता विभाग को सौंप दी थी.

जाँच और कार्रवाई

रघुनाथ मोहंती का यह भी कहना है कि अवैध खनन के लिए खानों के मालिक ज़िम्मेदार हैं, राज्य सरकार का इसमें कोई हाथ नही है.

राज्य के खनन मंत्री ने दावा किया कि सरकार इस मामले की विस्तृत जाँच करवा रही है.

उनका कहना है कि अब तक नज़र में जो भी मामले आए, उस पर उन्होंने तुरंत कार्रवाई भी की है.

उनके अनुसार खनन विभाग के 12 अधिकारियों को निलंबित करके उन्हें हिरासत में लिया गया है.

बीबीसी से हुई बातचीत में रघुनाथ मोहंती ने बेबसी ज़ाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार के लिए ये संभव नहीं है कि वो हर जगह नज़र रख सके कि कहाँ-कहाँ अवैध खनन हो रहा है.

राज्य सरकार ने अवैध खनन की जांच के आदेश लगभग उसी वक़्त दिए जब एक जनहित याचिका की सुनवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जाँच अवैध खनन पर बनी केंद्रीय समिति से कराने के आदेश दिए.

इस जनहित याचिका मे कहा गया है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कई बार शिकायत की गई कि वहाँ अवैध खनन हो रहा है, पर राज्य सरकार ने इन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया.

फ़िलहाल राज्य सरकार ने कथित रुप से अवैध खनन करने वाले 64 खदानों मे खनन का काम बंद करा दिया है.

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