आर्थिक प्रगति के लिए अंग्रेज़ी ज़रुरी

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Image caption भारत में अंग्रेज़ी बोलने वालों की संख्या बढ़ रही है लेकिन धीमे धीमे...

ब्रिटिश काउंसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अंग्रेज़ी का धीमा प्रसार उसकी आर्थिक प्रगति में बाधक बन सकता है.

बुधवार को लेखक और भाषाविद् डेविड ग्रैडॉल ने इंग्लिश नेक्स्ट इंडिया रिपोर्ट जारी की जिसके अनुसार भारत को लगातार आर्थिक प्रगति के लिए और अंग्रेज़ी बोलने वालों की सख्त ज़रुरत है.

रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर ब्रिटिश काउंसिल के मुख्य कार्यकारी मार्टिन डेविडसन का कहना था, ‘‘ भारत अपनी आर्थिक और शिक्षा के विकास के मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. हम भारत को पूरी मदद करने को तैयार हैं ताकि वो भविष्य में अंग्रेज़ी भाषा बेहतर ढंग से सीख पाएं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी भागेदारी बढ़ सके.’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अंग्रेज़ी भाषा का प्रसार अत्यंत धीमा है जो भारत को उन देशों की तुलना में पीछे कर सकता है जिन्होंने प्राइमरी स्तर पर अंग्रेजी़ की पढ़ाई को बेहतर ढंग से लागू किया है.

इतना ही नहीं रिपोर्ट के अनुसार देश में अंग्रेज़ी पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी है जिससे राष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेज़ी भाषा जानने वालों की संख्या तेज़ी से नहीं बढ़ रही है.

इसके अलावा भारत के कई छात्र ख़राब अंग्रेज़ी के कारण बेहतर उच्च स्तरीय शिक्षा से वंचित भी रह रहे है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास अगले दशक में युवा लोगों की बड़ी संख्या होगी और अगर भाषा के हिसाब से उन्हें अच्छा प्रशिक्षण मिले तो देश के राष्ट्रीय संपदा में बढ़ोतरी ही होगी.

हालांकि रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए शिक्षा और ट्रेनिंग में बड़ा निवेश करना होगा क्योंकि नई अर्थव्यवस्था में बेहतर अंग्रेज़ी बोलने वालों को ही नौकरियां मिल सकेंगी.

उल्लेखनीय है कि भारत में दुनिया भर में काम करने वाले लोगों का 17 प्रतिशत हिस्सा रहता है जो आगे बढ़कर 20 प्रतिशत होने वाला है.

रिपोर्ट के अनुसार किसी एक मॉडल के तहत भारत में अंग्रेजी पढ़ाने वालों और बोलने वालों की संख्या बढ़ाई नहीं जा सकती है और इसके लिए अलग अलग तरीकों से, स्थानीय ज़रुरतों को ध्यान में रखते हुए प्रयास करने होंगे.

ब्रिटिश काउंसिल भारत में अंग्रेज़ी शिक्षा के प्रचार प्रसार का कार्य भी देखती है.

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